जीवन शैली
सरकारी और प्राईवेट नशा-मुक्ति केन्द्रों का किया जायेगा मज़बूत-बलबीर सिंह सिद्धू
सिविल सर्जन 9वीं से 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को नशों के प्रभाव से सचेत करने के लिए साप्ताहिक प्रोग्राम चलाएं
चंडीगढ़ – पंजाब सरकार ने राज्य में चल रहे प्राईवेट और सरकारी नशा-मुक्ति और पुनर्वास केंद्रों का व्यापक स्तर पर मज़बूतीकरण करने के लिए विशेष नीति तैयार की है जिसके अधीन नशों की आदत से पीडि़त मरीज़ों को मानक स्तर की इलाज की सेवाएं मुहैया करवाई जाएंगी। इस बात का प्रगटावा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री स. बलबीर सिंह सिद्धू ने यहाँ प्राइवेट और सरकारी प्रैक्टिस कर रहे मनोचिकित्सकों की पहली मीटिंग में किया। इस मीटिंग में एस.टी.एफ. प्रमुख गुरप्रीत दिओ, आई.जी. राजेश कुमार जैसवाल, अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य, सतीश चंद्रा, कमिश्नर, ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन काहन सिंह पन्नू, एम.डी. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अमित कुमार, राजनैतिक सचिव/स्वास्थ्य मंत्री हरकेश चंद शर्मा मछली कलां, डायरैक्टर, स्वास्थ्य सेवाएं, डा. जसपाल कौर और प्राईवेट केन्द्रों के प्रबंधक उपस्थित थे।मीटिंग की अध्यक्षयता करते हुए स. बलबीर सिंह सिद्धू ने कहा कि मुख्यमंत्री पंजाब कैप्टन अमरिन्दर सिंह द्वारा नशों के विरुद्ध चलाई जा रही मुहिम को और मज़बूत करने के लिए राज्य के सभी नशा-मुक्ति केन्द्रों का मज़बूतीकरण करने के लिए यह मीटिंग रखी गई है जिसका मुख्य मंतव्य पीडि़तों को कम समय में मानक सेवाएं मुहैया करवाना है। उन्होंने कहा कि पंजाब के नोजवान बड़ी संख्या में अब नशों के कुरीति को छोड़ कर नयी जिदंगी की शुरुआत करने के लिए नशा-मुक्ति केन्द्रों का रूख कर रहे हैं। जिसके लिए यह लाजि़मी है कि राज्य में नये नशा-मुक्ति केन्द्रों और ओट क्लीनिक स्थापित किये जाएँ, जिसको अमली जामा पहनाते हुए पंजाब सरकार द्वारा राज्य में अतिरिक्त नशा-मुक्ति केंद्र और ओट क्लीनिक स्थापित करने का फ़ैसला किया गया है।मीटिंग में मनोचिकित्सकों की समस्याओं को सुनते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्राईवेट प्रेक्टिस कर रहे डॉक्टरों और नशा-मुक्ति केन्द्रों के लिए एक कमेटी का गठन किया जायेगा और कमेटी द्वारा लिए गए फ़ैसलों और सिफारिशों के आधार पर ही नशा-मुक्ति प्रोग्रामों के सम्बन्ध में भावी रूप-रेखा बनायी जायेगी। उन्होंने प्राइवेट प्रेक्टिस कर रहे डॉक्टरों और प्राईवेट केन्द्रों के प्रबंधकों को भरोसा दिलाया कि पंजाब सरकार नशा-विरोधी मुहिम के प्रति पूरी तरह गंभीर है और उनकी हर समस्या को हल करने के लिए हर महीने मीटिंग का आयोजन किया जायेगा।उन्होंने कहा कि सिविल सर्जन 9वीं से 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को नशों के प्रभाव से सचेत करने के लिए साप्ताहिक प्रोग्राम चलाएं।एस.टी.एफ. प्रमुख गुरप्रीत दिओ ने मीटिंग में कहा कि नशे की समस्या का सामना पूरा विश्व कर रहा है जिसके लिए हम सभी को एक मंच पर आकर इसके खि़लाफ़ लडऩा पड़ेगा। उन्होंने कहा कि आज यह ज़रूरत है कि नशे के विरुद्ध मुहिम चला रही पंजाब सरकार के सभी भागीदार विभागों में पूरा तालमेल हो जिससे हम किसी भी चुनौती को आसानी से काबू कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि प्राइवेट केन्द्रों की संख्या सरकारी केन्द्रों की अपेक्षा ज़्यादा है और इसलिए इन प्राईवेट केन्द्रों की निगरानी करनी भी ज़रूरी है जिससे निर्धारित की गई हिदायतों का उल्लंघन न हो। उन्होंने उपस्थित डॉक्टरों और प्रबंधकों को विश्वास दिलाया कि नशों की आदत से पीडि़त मरीजों के इलाज के दौरान किसी भी तरह की जाँच नहीं की जायेगी और उनकी पहचान को भी गुप्त रखा जायेगा।अतिरिक्त मुख्य सचिव सतीश चंद्रा ने कहा कि नशा-मुक्ति प्रोग्राम के अधीन ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा कैमिस्टों और केन्द्रों की कारगुज़ारी में सुधार लाने के लिए प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आदत बनाने वाली दवाओं की ग़ैर-कानूनी बिक्री रोकने के लिए यह ज़रूरी है कि कुछ निर्धारित कैमिस्टों को ही इन दवाओं की बिक्री करने की इजाज़त दी जाये जिस सम्बन्धी सरकार विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि लम्बे समय की बीमारी का ईलाज भी लम्बे समय तक चलता है जिसके लिए नशा-मुक्ति केन्द्रों में ईलाज की और बेहतर और मानक सेवाएं यकीनी तौर पर मुहैया करवाई जाएंगी।कमिश्नर, ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन काहन सिंह पन्नू, ने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा हिदायतें जारी की गई हैं कि जो कैमिस्ट आदत डालने वाली दवाओं की बिक्री सम्बन्धी नियमों की बार-बार उल्लंघना कर रहे हैं उन पर सख्त कार्यवाही की जाये। उन्होंने कहा कि इस मीटिंग में दिए गए हर सुझाव पर सरकार द्वारा गंभीरता से विचार किया जायेगा जिससे नशा-मुक्ति केन्द्रों की कारगुज़ारी को और अच्छा बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि नशा-मुक्ति केन्द्रों में मिल रही दवा का मकसद मरीज़ों को ख़तरनाक नशों की आदत से हटा कर इलाज द्वारा नशा-मुक्त करना है।मीटिंग में उपस्थित प्राईवेट डा. सत्या शर्मा, प्रधान इंडियन एसोसिएशन ऑफ प्राईवेट साईकैटरिस्ट पंजाब एंड चंडीगढ़ ब्रांच ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा यह प्रमाणित किया गया है कि बुपरीनॉरफीन और नैलाकसान दवा से मरीज़ के स्वास्थ्य पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि पंजाब में नशा-मुक्ति प्रोग्रामों की एक ही पैटर्न की हिदायतों को लागू किया जाये और तकनीकी माहिरों की राय के साथ ही नयी नीतियों को बनाया जाए। इस मीटिंग में स्वास्थ्य मंत्री ने उपस्थित अन्य प्राईवेट नशा-मुक्ति केन्द्रों के प्रबंधकों और प्राइवेट पै्रक्टिशनरों को भरोसा जताया कि उनकी समस्याओं को पड़ाववार हल किया जायेगा और प्राईवेट केन्द्रों के लाइसेंस को एक महीने में रिन्यू करने संबंधी जल्द हिदायतें जारी की जाएंगी। इसके साथ ही मीटिंग में कम्पल्सरी यूरिन स्क्रीनिंग को बंद करने सम्बन्धी फ़ैसला लिया गया।