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बिहार में चमकी बुखार से मरने वाले बच्चों की संख्या पहुंची 114

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बिहार में चमकी बुखार के खिलाफ लडाई में केन्द्र और राज्य सरकार युद्द स्तर पर प्रयास कर रहे है तो ईलाके में जागरुकता फैलाने का काम भी कर रहे है… इन सभी कोशिशो का थोड़ा फायदा दिखने लगा है लेकिन अभी भी चुनौती कम नही हुई है… इसबीच चमकी बुखार से मरने बाले बच्चों का आंकडा बढ़कर 114 हो गया है जबकि 300 बच्चों का अभी भी ईलाज जारी है। इसबीच स्वास्थ्य हालात को लेकर ये मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंच गया है जिसपर 24 जून को सुनवाई होगी।बिहार के कुछ जिलों में फैले दिमागी बुखार चमकी का कहर रुकने का नाम नहीं ले रहा है। मुजफ्फरपुर में चमकी से अब तक 114 बच्चों की मौत हो चुकी है, अस्पताल में अभी भी बीमार बच्चे लगातार आ रहे हैं। मुजफ्फरपुर मेडिकल कॉलेज और केजरीवाल अस्पताल में इस बीमारी से मरने वाले बच्चों की संख्या जहां 114 हो चुकी है, वहीं 300 के करीब अब भी गंभीर रूप से बीमार हैं। हालांकि राहत की बात ये है कि अब अभिभावक अपने बच्चों को समय से अस्पताल ला रहे हैं जिससे बच्चों की जिंदगी बचायी जा रही है। अपने कलेजे के टुकड़ों को इस दुनियां से जाते हुए देखकर परिजनों का बुरा हाल है, लगातार बच्चों की बढ़ती मौत की संख्या ने इलाके में कोहराम मचा रखा है।इस सबके बीच बिहार सरकार ने दिमागी बुखार से पीडि़त बच्‍चों को बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्‍ध कराने के लिए दरभंगा और पटना मेडिकल कॉलेज अस्‍पतालों के डॉक्‍टरों को भी मुजफ्फरपुर भेजने का फैसला किया है। वहीं अब बेगुसराय में भी इस बीमारी का कहर दिखने लगा है, बेगूसराय में अब तक 16 बच्चे चमकी बुखार से पीड़ित हुए हैं जिसमें से 6 बच्चों की मौत हो चुकी है, फिलहाल 4 बच्चों का इलाज अस्पताल में चल रहा है जबकि दो बच्चों को यहां से पटना रेफर किया गया है।वहीं बिहार में बच्चों की मौत का कारण बन रही इस बीमारी को लेकर उच्चतम न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई है, कोर्ट इस मामले पर जल्द सुनवाई के लिए तैयार हो गया है, 24 जून को इस मामले पर सुनवाई होगी। इसके अलावा पटना हाईकोर्ट में भी एक जनहित याचिका दाखिल की गयी है। बीमारी को देखते हुए झारखंड और राजस्थान जैसे राज्यों में भी किसी अनहोनी की स्थिति में बीमारी से निपटने के पूरे इंतजाम किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार ने भी इंसेफ्लाइटिस पर चिंता जताई है, और बाल चिकित्सकों और पैरामेडिक्स की टीमों को मुजफ्फरपुर भेजा गया है। इसके अलावा केंद्र सरकार पहले ही एक रिसर्च टीम को बीमारी के सही कारणों का पता लगाने के लिए भेज चुकी है। केन्‍द्र सरकार बीमारी की रोकथाम के लिए बिहार को हर संभव सहायता दे रही है।

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