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चंद्रयान-2 का 15 जुलाई को प्रक्षेपण

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चन्द्रयान-2 मिशन को प्रक्षेपित करने के लिये बुधवार को इसरो ने तारीख का एलान कर दिया है. चन्द्रमा के बारे में जानकारी जुटाने के लिए इसको इसी साल 15 जुलाई को प्रक्षेपित किया जाएगा और ये 15 दिनों तक चन्द्रमा के आंकड़े जुटाएगा जो दुनिया को चांद को और करीब से जानने में मदद करेगा.इंतजार की घड़ियां अब हुईं खत्म. हम सबके चंदा मामा यानि चांद को छूने का, उसके बारे में और भी बहुत कुछ जानने का, समझने का वक्त आ गया है. अगले महीने की 15 तारीख को हमारे वैज्ञानिक चंद्रयान-2 मिशन के जरिए प्रज्ञान को चांद पर भेजने वाले हैं. प्रज्ञान यानि वो रोवर, जो चांद की धरती पर उतरेगा और वहां से बहुत सारी जानकारियां हमें भेजेगा. ये जानकारियां हम तक सितंबर के पहले सप्ताह से मिलने लगेंगी.इसरो 15 जुलाई की सुबह 2 बजकर 51 मिनट पर चंद्रयान-2 को लॉन्च करेगा. इस मिशन का सबसे कठिन हिस्सा है चंद्रमा की सतह पर सफल और सुरक्षित लैंडिंग कराना. चंद्रयान-2 चंद्रमा की सतह से 30 किमी की ऊंचाई से नीचे आएगा. उसे चंद्रमा की सतह पर आने में करीब 15 मिनट लगेंगे. यह 15 मिनट इसरो के लिए बेहद कठिन होगा क्योंकि इसरो पहली बार ऐसा मिशन करने जा रहा है.लॉन्च के बाद अगले 16 दिनों में चंद्रयान-2 पृथ्वी के चारों तरफ 5 बार ऑर्बिट बदलेगा. इसके बाद 6 सितंबर को चंद्रयान-2 की चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास लैंडिंग होगी. इसके बाद रोवर को लैंडर से बाहर निकलने में 4 घंटे लगेंगे. इसके बाद रोवर एक सेंटीमीटर प्रति सेकंड की गति से करीब 15 से 20 दिनों तक चांद की सतह से डाटा जमा करके लैंडर के जरिए ऑर्बिटर तक पहुंचाता रहेगा. ऑर्बिटर फिर उस डाटा को इसरो को भेजेगा.जैसा कि हमने आपको पहले ही बताया कि ये मिशन इतना आसान नहीं हैं क्योंकि सात तरह की चुनौतियां आएंगी चंद्रयान-2 के सफर में:
पहली चुनौती- सटीक रास्ते पर ले जाना
दूसरी चुनौती- गहरे अंतरिक्ष में संचार
तीसरी चुनौती- चांद की कक्षा में पहुंचना
चौथी चुनौती- चांद की कक्षा में घूमना
पांचवीं चुनौती- चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग
छठीं चुनौती- चंद्रमा की धूल
सातवीं चुनौती- बदलता तापमान
जीएसएलवी मार्क-3 रॉकेट से होगी लॉन्चिंग
चंद्रयान-2 को सबसे ताकतवर रॉकेट जीएसएलवी मार्क-3 से पृथ्वी की कक्षा के बाहर छोड़ा जाएगा, फिर उसे चांद की कक्षा में पहुंचाया जाएगा फिर लैंडर चांद की सतह पर उतरेगा. इसके बाद रोवर उसमें से निकलकर विभिन्न प्रयोग करेगा. चांद की सतह, वातावरण और मिट्टी की जांच करेगा. वहीं ऑर्बिटर चंद्रमा के चारों तरफ चक्कर लगाते हुए लैंडर और रोवर पर नजर रखेगा. साथ ही रोवर से मिली जानकारी को इसरो सेंटर भेजेगा. रोवर के एक व्हील पर जहां अशोक चक्र अंकित होगा, वहीं दूसरे व्हील पर इसरो का लोगो अंकित होगा. साथ ही रोवर और लैंडर पर तिरंगे का चिह्न भी होगा, जो हमारी एक और शान को दर्शाएगा.

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