पंजाब

कैप्टन अमरिन्दर सिंह द्वारा फतेहवीर की मौत के बाद सभी खुले बोरवेलों को बंद करने के निर्देश

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मुख्यमंत्री द्वारा ऐसी घटनाएं रोकने के लिए एस.ओ.पीज़ तैयार करने के लिए आफ़ दा प्रबंधन ग्रुप को भी आदेश

चंडीगढ़ – संगरूर जिले के सुनाम इलाके के गांव भगवानपुर में बोरवेल में गिरकर 2 वर्षीय फतेहवीर सिंह की हुई दर्दनाक मौत पर गहरा दु:ख जताते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने राज्य भर में खुले पड़े सभी बोरवेलों को बंद करने के आदेश दिए हैं। फतेहवीर सिंह को 108 घंटों की सख्त जद्दो-जहद के बावजूद बचाया न जा सका। मुख्यमंत्री ने राज्य भर में खुले पड़े बोरवेलों संबंधी डिप्टी कमिश्नरों से जानकारी मांगी है और उन्होंने इस तरह की दु:खद घटना से बचने के लिए इनके सम्बन्ध में तुरंत कदम उठाए जाने के निर्देश दिए हैं। इस घटना पर गंभीर नोटिस लेते हुये मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव के नेतृत्व वाले आपदा प्रबंधन ग्रुप को ऐसी घटनाओं से बचने और रोकने के लिए एस.पी.ओज़ (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजऱ) को अंतिम रूप देने के लिए कहा है। मुख्यमंत्री फतेहवीर को बचाने के लिए बचाव कार्यों की लगातार निगरानी करते रहे। प्राकृतिक आपदों से निपटने के लिए गठित किये ग्रुप को राहत कामों में किसी भी तरह के कमी का अध्ययन करने और भविष्य में इस तरह के किसी भी मामले में तेज़ी से कार्यवाही को यकीनी बनाने के लिए अपनी सिफारिशें देने के लिए कहा है। इस ग्रुप में दूसरे सदस्यों में प्रिंसीपल सचिव वित्त (पी.एस.एफ), वित्त कमिश्नर ग्रामीण विकास एवं पंचायत (एफ.सी.आर.डी.पी) और वित्त कमिश्नर विकास (एफ.सी.डी) शामिल हैं। फतेहवीर सिंह की मौत से तुरंत बाद मुख्यमंत्री ने अपने टवीट में कहा, ‘‘ फतेहवीर सिंह की दु:खद मौत संबंधी सुनकर मन बहुत उदास हुआ है। मैं वाहेगुरू के आगे अरदास करता हूं कि इस भारी घाटे को सहन करने के लिए परमात्मा उसके परिवार को हौंसला प्रदान करे। खुले बोरवेलों के सम्बन्ध में सभी डिप्टी कमिश्नरों से रिपोर्टें मांगी गई जिससे भविष्य में ऐसी दु:खद घटनाओं को रोका जा सके। उन्होंने आगे लिखा है, ‘‘ सभी डिप्टी कमिश्नरों को हिदायतें दी गई हैं कि वह किसी भी जिले में कोई भी खुला बोरवेल न होने को यकीनी बनाएं और उनको 24 घंटों में इस सम्बन्धी रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा गया है। अगर आपके इलाके में कोई भी खुला बोरवेल है तो आप हमारे हेल्पलाइन नंबर 0172 -2740397 पर फ़ोन कर सकते हैं। बच्चे और उसके परिवार के लिए अरदास करते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि 6 जून को शाम 4:15 बजे बच्चे के 125 फुट गहरे बोरवेल में गिर जाने संबंधी सूचना मिलने के कुछ मिनटों के अंदर ही जि़ला प्रशासन हरकत में आया और बचाव कार्य आरंभ कर दिए गए। एन.डी.आर.एफ. बचाव कामों में जुट गई और पटियाला, संगरूर और चंडीमन्दर कमांड की सेना की अथॉरिटी को भी उसी समय पर सूचित कर दिया गया।एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया मुख्यमंत्री द्वारा अब तक हासिल की रिपोर्टों के मुताबिक एन.डी.आर.एफ. के जवानों ने चाहे पहुँचने के 10 घंटों के अंदर ही बच्चे की दोनों कलाइयों के आसपास रस्सी बांध ली थी परन्तु पाईप का घेरा तंग था जो बच्चे के फंस जाने का कारण बन गया जिस कारण मजबूरन उनको अपना यह तरीका त्यागना पड़ा। इसी दौरान जे.सी.बी. और अन्य मशीनों ने गहराई को घटाने के लिए मौके पर उस जगह पर मिट्टी खोदने का काम किया जहाँ यह कार्य किये जा रहे थे।जि़ला प्रशासन द्वारा हर तरह का संभव तकनीकी सहयोग मुहैया करवाया गया परन्तु किसी भी ढलान को गिरने से रोकने के लिए समानांतर मिट्टी खोदने और उसके बराबर पाईपें डालने में 46 घंटों का समय लगा। इसी दौरान जहाँ पाईप डाली जा रही थी, वहीं दिशा की समस्या होने के कारण कार्यवाही में विघ्न पड़ा जिस कारण कुछ समतल खुदाई करने की भी ज़रूरत पैदा हुई।एन.डी.आर.एफ. के अधिकारी, जो पूरे ऑपरेशन के दौरान सेना के साथ लगातार संपर्क में थे, के मुताबिक बच्चे को निकालने की प्रक्रिया के दौरान उसे शारीरिक तौर पर कोई हानि नहीं पहुँची। यह प्रक्रिया हाथों से गई क्योंकि मशीनरी के प्रयोग से बच्चे का नुक्सान होने की संभावना थी क्योंकि ऐसी मशीनरी के लिए खासतौर पर पानी की ज़रूरत होती है।

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