भारत
विदेश मंत्री एस जयशंकर का पाकिस्तान पर सीधा निशाना
नई दिल्ली – भारत के नए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पहली बार खुले मंच से इशारों में पाकिस्तान पर निशाना साधा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बिना नाम लिए पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया।दरअसल, विदेश मंत्री एस जयशंकर से सार्क देशों को लेकर कुछ सवाल किए गए, जिसके जवाब में एस जयशंकर ने कहा कि देखिए सार्क में कुछ समस्याएं थी, जिनको दूर नहीं किया जा सकता था। सार्क के सवाल पर उन्होंने आगे कहा कि- हम सबको पता है समस्याएं क्या रहीं हैं, अगर आप आतंकवाद के मुद्दे को हटा भी दें तो भी कनेक्विटी और ट्रेड जैसे कई मुद्दे बीच में आ जाते हैं।नव नियुक्त विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बिम्सटेक को लेकर आगे कहा- ”अगर आप पूछेंगे कि हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण में बिम्सटेक देशों को क्यों बुलाया तो मैं कहूंगा बिम्सटेक में हमें ऊर्जा , मानसिकता और संभावनाएं दिखती हैं”।वहीं पीएम नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में बिम्सटेक देशों को महत्व दिए जाने के सवाल पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा- ”ये पाकिस्तान के लिए सीधा संदेश है, जो सार्क का तो हिस्सा है लेकिन बिम्सटेक का नहीं”।बता दें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में बिम्सटेक देशों के समूह को आमंत्रित किया गया था।लेकिन पाकिस्तान के पीएम इमरान खान को नहीं बुलाया गया क्योंकि पाकिस्तान बिम्सटेक का हिस्सा नहीं है।
एस जयशंकर ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण में बिम्सटेक देशों को बुलाया जाना बताता है कि भारत का पूरा ध्यान सबसे पहले अपने पड़ोसी देशों पर है।एस जयशंकर ने साथ ही ये भी बताया कि 2014 में पीएम नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह से पाकिस्तान को दूर रखने के लिए सार्क देशों को आमंत्रित नहीं किया गया था।
एय जयशंकर ने चीन-अमेरिका ट्रेड युद्ध को लेकर कहा कि अमेरिका और चीन के बीच उपजे इन तनावों से हमें क्या फायदा हो, उनका ध्यान सिर्फ इस ओर केंद्रित है।
एय जयशंकर ने कहा- ” ऐसे तनाव के हालात में संभावनाएं होती हैं। लेकिन यहां खतरे भी होते हैं। लिहाजा मेरा ध्यान भारत के लिए संभावनाएं बढ़ाने और खतरे कम करने पर रहेगा।”
विदेश मंत्री ने आगे कहा- अपने कार्यकाल के दौरान मेरा ध्यान दक्षिण एशिया में कनेक्विटी बढ़ाने पर होगा।हम अपने पड़ोसियों को लेकर सहयोगी भावना का प्रदर्शन करेंगे।चूंकि हम दक्षिण एशिया की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था हैं, इसलिए ये हमारी जिम्मेदारी है कि कैसे हम सभी पड़ोसी देशों को साथ लेकर चलें।