भारत
रेपो रेट में 0.25 फीसद की हुई कटौती, सस्ता होगा कर्ज़
भारतीय रिजर्व बैंक मौजूदा वित्त-वर्ष की दूसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति का ऐलान कर दिया, जिसमे रेपो रेट में 0.25 फीसद की कटौती हुई है। रेपो रेट की नई दर घटकर 5.75 फीसदी हो गई है।महंगाई दर और विकास दर की स्थिति को देखते हुए ये बड़ा फैसला माना जा रहा है। मुख्य ब्याज दर यानी रेपो रेट अब 6 फीसदी से घटकर 5.75 फीसदी के स्तर पर आ गई हैआरबीआई ने अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति गुरूवार को जारी कर दी है। मुख्य ब्याज दरों में लगातार तीसरी बार कटौती का ऐलान किया है। तीन दिनों की बैठक के बाद ब्याज दरों में 25 बेसिस अंकों की कटौती का फैसला हुआ। महंगाई दर और विकास दर की स्थिति को देखते हुए ये बड़ा फैसला माना जा रहा है। मुख्य ब्याज दर यानी रेपो रेट अब 6 फीसदी से घटकर 5.75 फीसदी के स्तर पर आ गई है। मौद्रिक नीति का एलान करते हुए आरबीआई गवर्नर ने कहा है कि जीडीपी में भी वित्त वर्ष 2019 और 2020 में 20 बेसिस प्वांइट की कमी आ सकती है। वृद्धि दर के अनुमान में कमी का कारण कमजोर वैश्विक परिदृश्य तथा निजी खपत में कमी है।रेपो दर वह दर है जिस पर रिजर्व बैंक बैंकों को कर्ज देता है। इस वित्त वर्ष की ये दूसरी मौद्रिक नीति है और ये लगातार तीसरा मौका है जब केंद्रीय बैंक ने बैंकों के लिए सस्ता धन सुलभ कराने के लिए अपनी नीतिगत दर में कटौती की है। इन तीनों मौकों को मिला कर रेपो दर में अभी तक कुल 0.75 प्रतिशत की कटौती हो चुकी है। लेकिन आरबीआई के द्दारा की गई तीसरी बात इस कटौती से लोगों को क्या फायदा होगा ये जानना भी जरूरी है।भले ही आरबीआई ने जीडीपी के 6.8% रहने की उम्मीद जताई हो लेकिन बुधवार को ही विश्व बैंक ने भारत की जीडीपी 7.2% की संभावना व्यक्त की है जिसके बाद उम्मीद है कि विकास दर को अब दिन-ब-दिन बढ़ावा ही मिलेगा।