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पंजाब विजीलैंस ब्यूरो द्वारा वीरूमल चावल मिल में 40 करोड़ रुपए के धान घोटाले के मामले में भगौड़ा डी.एफ.एस.सी. गिरफ्तार

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चंडीगढ़ – पंजाब विजीलैंस ब्यूरो ने आज जि़ला खाद्य एवं सिविल सप्लाई कंट्रोलर (डीएफएससी) अमृतसर ए.पी. सिंह को गिरफ़्तार किया है, जिसने दूसरे अधिकारियों और वीरूमल मिलख राज चावल मिल के मालिक के साथ मिल कर सरकारी खजाने में 40 करोड़ रुपए का घपला किया है। इस संबंधी जानकारी देते हुये आज यहाँ विजीलैंस ब्यूरो के प्रवक्ता ने बताया कि ई.ओ.डबल्यू, विजीलैंस ब्यूरो, सिट (विशेष जांच टीम) ने दोषी डी.एफ.ऐस.सी. को पटियाला से गिरफ़्तार किया है जोकि गिरफ़्तारी के डर से फऱार था। उन्होंने बताया कि आई.पी.सी. की धारा 120 -बी, 406, 409, 420, 467,468, 471 और भ्रष्टाचार रोकथान कानून की धाराओं 13 (1) (डी), 13 (2) के तहत एफ.आई.आर. नं. 44 पुलिस थाना जंडियाला गुरू, जि़ला अमृतसर में पहले ही दर्ज है और विजीलैंस ब्यूरो द्वारा जि़ला पुलिस से इस केस की जांच अपने हाथ में ली गई थी।
उन्होंने बताया कि धान के घोटाले के इस मामले में अन्य सह-दोषी जिनमें जि़ला खाद्य एवं सिविल सप्लाई अधिकारी रमिन्दर सिंह बाठ और सहायक खाद्य एवं सिविल सप्लाई अधिकारी विपन शर्मा और फूड इंस्पेक्टर गुरजिन्दर सिंह शामिल हैं, को ब्यूरो द्वारा पहले ही गिरफ़्तार कर लिया गया है और कुछ व्यक्ति अभी भी फऱार हैं।
प्रवक्ता ने आगे बताया कि दोषी डी.एफ.एस.सी. ने विभागीय अधिकारियों और वीरूमल मिलख राज चावल मिल के मालिक के साथ मिल कर साजिश रची और अपने पद का दुरुपयोग करते हुये राज्य सरकार को बड़ा नुक्सान पहुँचाया। उन्होंने बताया कि दोषी अधिकारियों की मदद से वीरूमल मिलख राज चावल मिल के मालिक (दोषी) ने सरकारी धान पर पंजाब नेशनल बैंक से तकरीबन 200 करोड़ का लोन लिया और पी.एन.बी. और खाद्य एवं सिविल सप्लाई विभाग के साथ क्रमवार तकरीबन 200 करोड़ रुपए और 40 करोड़ रुपए की ठगी मारी विजीलैंस ब्यूरो द्वारा अब तक की जांच से उन संदिग्ध व्यक्तियों के विरुद्ध सबूत सामने आए हैं जो अपनी ड्यूटियां निभाने में नाकाम रहे हैं। जंडियाला में स्थित उक्त चावल मिल में इस मिल के मालिक द्वारा करोड़ों रुपए की कीमत के सरकारी धान के बड़ी मात्रा में गबन का मामला सामने आया है। प्रवक्ता ने बताया कि दोषी डी.एफ.एस.सी. का रिमांड लेने के लिए उसको अदालत के सामने पेश किया जायेगा जिससे इस मामले के पीछे साजिश और उक्त घोटाले में दोषियों की भूमिका का पता लगाया जा सके।

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