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अंतरिक्ष में भारत की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

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मिशन था शक्ति का…वो शक्ति जो शांति को स्थापित करती है…वो शक्ति जो शक्ति का संतुलन साधती है…वो शक्ति जो नापाक इरादों को चेताती है कि हमारी नज़र है हर जगह, जल, नभ, थल और अब अंतरिक्ष में भी. बुधवार को देश ने एंटी सैटेलाइट मिसाइल तकनीक को सिर्फ हासिल ही नहीं किया बल्कि उन तीन देशों की कतार में गर्व के साथ शामिल हो गया, जिनके पास इस स्तर की रक्षा तकनीकी है.

बुधवार दोपहर बाद ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एलान किया कि भारत अंतरिक्ष में एंटी सैटेलाइट मिसाइल लॉन्च करने वाले देशों में शामिल हो गया है. अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत चौथा देश है, जिसने यह क्षमता हासिल की है.

डीआरडीओ और देश के वैज्ञानिकों अंतरिक्ष में 300 किलोमीटर दूर एक सैटेलाइट को मिसाइल से मार गिराया.

भारत ने अपना पहला एंटी सैटेलाइट हथियार का परीक्षण ओडिशा से किया. जिसने साबित किया कि जब कोई दुश्मन देश का सैटेलाइट हम पर नज़र रखेगा, तो हम उसे ध्वस्त कर सकते हैं, ये घोषणा है हमारी अंतरिक्ष में तकनीकी क्षमता की. लेकिन इसके साथ साथ इसके अपने दूरगामी परिणाम होंगे जो वक्त की ज़रूरत है.

प्रधानमंत्री ने साफ तौर पर कहा कि भारत ने इस क्षमता का विकास किसी अन्य देश को ध्यान में रख कर नहीं किया है. ये सिर्फ और सिर्फ आत्मरक्षा के लिए है.

अंतरिक्ष में दुश्मनों के उपग्रहों को मार गिराने की इस क्षमता का यानि एंटी सैटेलाइट हथियार का भारत का ये पहला प्रयोग और पूरी तरह सफल अभियान रहा. जबकि कई बड़े देशों को इसके लिए कई कोशिशें करनी पड़ी हैं, जैसे कि चीन जिसे इस क्षमता को हासिल करने में पांच बार कोशिश करनी पहली. भारतीय मिसाइल ने करीब 300 किमी की ऊंचाई पर अपनी ही सैटेलाइट को सटीक निशाना लगाया.

मिशन शक्ति के सफलता की घोषणा के बाद बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाद मिशन शक्ति के सफल संचालन में शामिल वैज्ञानिकों से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बातचीत की और स्पष्ट किया कि पूरे देश को उन पर गर्व है. ये बड़ी सफलता इसलिए भी ख़ास हो जाती है क्योंकि मेक-इन इंडिया पहल के अनुरूप वैज्ञानिकों ने विश्व को यह संदेश दिया है कि हम किसी से कम नहीं हैं.

इस बीच विदेश मंत्रालय ने भी कहा है कि परीक्षण पूरी तरह से सफल रहा और योजना के तहत सभी मानदंडों को पूरा किया. एक सवाल के जवाब में विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत का परीक्षण किसी देश को निशाना बनाकर नहीं किया गया है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि  भारत का इरादा बाहरी अंतरिक्ष में हथियारों की दौड़ में शामिल होना नहीं है और उसने हमेशा इस बात का पालन किया है कि अंतरिक्ष का केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए ही इस्तेमाल किया जाए.

प्रधानमंत्री का संदेश ये भी था कि भारत शांति और सद्भाव के लिए काम करने वाली शक्तियों को शांति की प्राप्ति के लिए हमेशा शक्ति संपन्न बने रहना होगा.

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