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बद्धकोणासन और उपविष्ठकोणासन महिलाओं को होने वाली तकलीफों को दूर करने में हैं लाभकारी

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योगासन : महिलाओं को होने वाली तकलीफों को दूर करने में कारगर होंगे बद्धकोणासन और उपविष्ठकोणासन

घर और बाहर की जिम्मेदारियां निभाने वाली महिलाओं के लिए अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखना भी जरूरी है। अपनी व्यस्त दिनचर्या में कुछ समय योग को देना उनकी सेहत के लिए फायदेमंद साबित होगा। यहां जानिए ऐसे आसन जो जो महिलाओं को पीरियड्स के दौरान होने वाली आम समस्याओं से राहत देते हैं।
सबसे पहले दंडासन में बैठिये। फिर घुटने मोड़कर फैलाइए और पैरों को कदमों के पास धड़ से सटाकर रखिए। जांघों को फैलाइए और घुटनों को जमीन की ओर दबाइए। रीढ़ की हड्डी को सीधा रखकर सामान्य श्वसन करते हुए एक से पांच मिनिट की अवधि तक रोकने का प्रयत्न कीजिए। यह आसन पीठ केबल लेटकर भी किया जा सकता है।

लाभ : इस आसन से महिलाओं को मासिक स्त्राव के दौरान होने वाली तकलीफों से राहत मिलती है। इसे नियमित करने से उदर के निचलेभाग को आराम मिलता है और हल्कापन महसूस होने लगता है।
विशेष : यह आसन महिलाओं के लिए वरदान है, एवं सायटिका व हर्निया में भी बहुत लाभकारी है। इसे पीरियड्स के दौरान भी किया जा सकता है।

सर्वप्रथम दंडासन में बैठिए। फिर दोनो पैरों को 1.5 से 2 फीट केअंतर में फैलाइए। ध्यान रखें इस दौरान पैरों का पिछला हिस्सा जमीन पर पूर्णतः चिपका रहे। अब हथेलियां शरीर के पीछे, बाहरी दिशा में जमीन पर रखकर रीढ़ की हड्डी को उठाइए। सीना चौड़ा और गर्दन सीधी रखिए। सामान्य सांस लेतेहुए 1 से 5 मिनिट तक धीरे-धीरे अवधि बढ़ाते जाइए।

लाभ : मासिक रजस्राव में अनियमतिता को कम करता है। उदर के निचले भाग, जांघों में होने वाले दर्द, थकान, इनसे पैदा होने वाला मानसिक असंतुलन, मनोधैर्य, और स्थिरता की क्षति आदि के लिए भी यह आसन उपयुक्त है। मानसिक स्तर पर, ईर्ष्या, क्रोध जैसे आवेशों पर सहजता से काबू पाने में भी उपविष्ठकोणासन बहुत सहायक है। पेल्विक एरिया में रक्त संचार बढ़ाने में मदद करता है। महिलाओं की रजोवाहक नलिका किसी रुकावट के कारण बंद हो तो यह आसन लाभकारी है।

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