भारत
पीएम ने राष्ट्र को समर्पित किया राष्ट्रीय समर स्मारक
प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को राष्ट्रीय समर स्मारक राष्ट्र को
समर्पित किया. इस स्मारक में देश की रक्षा के लिए अपना जीवन बलिदान करने
वाले सैनिकों के नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज़ किए गए हैं. उन्होंने मेजर
ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम में पूर्व सैनिकों को संबोधित भी किया और कहा
कि मौजूदा सरकार के लिए फैमली फर्स्ट नहीं है, बल्कि इंडिया फर्स्ट है.
राष्ट्रीय
समर स्मारक दशकों बाद राष्ट्र को समर्पित किया गया. ये उन वीर सेना के
तीनों अंगों के सैनिकों का सम्मान है, जिन्होंने अपना सर्वस्व राष्ट्र को
भेंट कर दिया. इंडिया गेट के नज़दीक बने इस स्मारक में उन भारतीय सैनिकों
के नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज़ किए गए हैं, जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र की
शांतिवाहिनी टुकड़ियों में सेवाएं देते हुए वीरगति को प्राप्त किया.
भारतीय
सेना के तीनों अंगों की प्रमुख, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने
प्रधानमंत्री की इस मौक़े पर अगुवाई की. इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने 3
परमवीर चक्र विजेताओं रिटायर्ड सूबेदार मेजर योगेन्द्र सिंह यादव, सूबेदार
संजय कुमार और मानद कैप्टन बाना सिंह से मुलाक़ात की. इन सभी परमवीर चक्र
विजेताओं की प्रतिमा “परम योद्धा स्थल” में भी स्थापित है. दरअसल राष्ट्रीय
समर स्मारक में कुल 21 परमवीर चक्र विजेताओं की कांस्य की प्रतिमा वीरता
के प्रतीक रूप और साहस की याद दिलाने के लिए लगाई गई है.
प्रधानमंत्री
मोदी ने राष्ट्रीय समर स्मारक की लौ प्रज्ज्वलित कर इस स्मारक को राष्ट्र
को समर्पित किया. ये लौ सदैव उन महान सैनिकों के सम्मान में प्रज्ज्वलित
रहेगी, जिन्होंने देश के लिए प्राण न्योछावर कर दिए.
राष्ट्रीय समर
स्मारक को मुख्य रूप से चार चक्रों के डिजाइन में बनाया गया है. अमर चक्र
एकदम केंद्रीय चक्र है और बीचो-बीच स्थित है, ये अमरता का प्रतीक है. दूसरा
वीरता चक्र का है, जो बहादुरी की घटनाओं को चित्रित किए हुए वीरता का
प्रतीक है. इसके बाद है त्याग चक्र है ये बलिदान को प्रदर्शित करता है.
इसके बाद सबसे बाहरी चक्र को नाम दिया गया है रक्षक चक्र जो सुरक्षा को
प्रदर्शित करता है.
यहां त्याग चक्र में 25 हज़ार 942 सैनिकों के
नाम दर्ज़ किए गए हैं. ये वो सैनिक हैं जिन्होंने आज़ादी के बाद देश की
रक्षा करते हुए अपने आज को कुर्बान किया और शहादत दी.
राष्ट्रीय समर
स्मारक देशवासियों के लिए सैनिकों की ओर से एक संदेश है कि सीमाओं पर जब
प्रहरी अडिग है, तो देशवासी सुरक्षित हैं और ये कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से
अपने शहीद जांबाज सैनिकों को एक विनम्र श्रद्धाजंलि भी.