पंजाब

पी.एस.आई.ई.सी. के औद्योगिक प्लाटों के डिफॉलटर अलाटियों को उत्पादन /निर्माण शुरू करने के लिए समय सीमा में ढील दी-सुंदर शाम अरोड़ा

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चंडीगढ़ – उद्योगपतियों को बड़ी राहत देते हुए पंजाब स्मॉल इंडस्ट्रीज़ और एक्सपोर्ट कोर्पोरेशन लिमटिड (पी.एस.आई.ई.सी.) राज्य के विभिन्न फोकल प्वाइंटों में विकसित हुए इंडस्ट्रियल प्लाटों के डिफॉलटर अलाटियों को दी गई समय सीमा में वृद्धि की मंजूरी दे रही है जिससे सम्बन्धित अलॉटमैंट पत्र/ट्रांसफऱ पत्र/लीज़ दस्तावेज़ में दी असली समय सीमा की अवधि बितने के बाद उत्पादन और निर्माण को फिर शुरू किया जा सके। यह जानकारी उद्योग और वाणिज्य मंत्री, पंजाब श्री सुन्दर शाम अरोड़ा ने दी। उन्होंने कहा कि राज्य में पी.एस.आई.ई.सी. द्वारा विकसित विभिन्न फोकल प्वाइंटों के समूह डिफॉलटर इंडस्ट्रियल प्लान होलडजऱ् को दिए समय में 30 सितम्बर, 2020 तक एक्स्टेंशन देने की आज्ञा दी जायेगी। समय सीमा में वृद्धि की आज्ञा एक्स्टेंशन फीस की अदायगी के बाद दी जायेगी जो सम्बन्धित फोकल प्वाइंट ऑपरेटिव में कोर्पोरेशन द्वारा तय मौजूदा रिज़र्व कीमत का 1 फीसदी प्रति वर्ष के हिसाब से चार्ज किया जायेगा। डिफॉलटर अलाटियों को मंजूरी के लिए अपना बिल्डिंग प्लान 30 जून, 2019 तक जमा करवाना होगा और साइट में 30 सितम्बर, 2019 तक उत्पादन को शुरू करना यकीनी बनाना होगा।श्री सुन्दर शाम अरोड़ा ने कहा कि अलाटियों को पेश मुश्किलों और इंडस्ट्रियल एसोसिएशनों की माँगों को विचारते हुए निगम के बोर्ड ऑफ डायरैक्टर्ज़ और सरकार द्वारा एक्स्टेंशन फीस की अदायगी के उपरांत विभिन्न फोकल प्वाइंटों के डिफालटर प्लाट होलडजऱ् को निर्माण/उत्पादन की शुरूआत के लिए अतिरिक्त समय की मंजूरी दी गई है। उन्होंने कहा कि भुगतान न करने की सूरत में अलॉटमैंट के रद्द होने, अलॉटमैंट से सम्बन्धित शर्तों के अनुसार प्लाट की बहाली के अलावा जमा राशि कीे ज़ब्ती के लिए प्लाट के अलाटी ख़ुद जि़म्मेदार होंगे।श्री अरोड़ा ने कहा कि पिछले कई वर्षों से उद्योगों को मंदी का सामना करना पड़ रहा है, जिस कारण कई औद्योगिक एसोसिएशनें और अलाटियों द्वारा विभिन्न मंचों पर समय सीमा बढ़ाने की माँग की जा रही है। इन एसोसिएशनों ने वकालत की कि 2016 में नोटबन्दी, 2017 में जी.एस.टी., महँगाई और विदेशी मुद्रा कीमतों में वृद्धि ने नये प्रोजेक्टों के अमल को प्रभावित किया और एन.पी.ए. को ध्यान में रखते हुए बैंक आसानी से नये प्रोजेक्टों के लिए लोन नहीं दे रहे। इस कारण सम्बन्धित प्लाट होलडरों को कम-से-कम और 2 वर्ष की एक्स्टेंशन की मंज़ूरी देने के लिए उनकी तरफ से आग्रह किया गया है।श्री अरोड़ा ने कहा कि उपरोक्त एक्स्टेंशन शर्त के अधीन होगी जिसके अंतर्गत सम्बन्धित डिफॉलटर प्लाट होल्डर को 30 जून, 2019 तक या इससे पहले प्लाट की बकाया कीमत के साथ ब्याज समेत बढ़ी लैंड्ड कोस्ट और ज़रूरी एक्स्टेंशन फीस जमा करवानी होगी। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि उपरोक्त समय सीमा बढ़ाने के लिए यह आखिरी मौका है और असफल होने की स्थिति में डिफॉलटर प्लाट होल्डरों की साइट को निगम अलॉटमैंट के नियमों अनुसार रद्द कर दिया जायेगा या इस प्रक्रिया को फिर शुरू करना पड़ेगा। सम्बन्धित प्लाट धारकों को 30 जून, 2019 से पहले निर्धारित प्रोफार्मे के अंतर्गत अंडरटेकिंग जमा करवाने के लिए कहा जायेगा। जिन मामलों में उत्पादन की शुरुआत के लिए बढ़ाए गए समय की अवधि पहले ही पूरी हो चुकी होगी ऐसे मामलों में विभिन्न फोकल प्वाइंटों के डिफॉलटर प्लाट होलडजऱ् की तबदीली की आज्ञा ट्रांसफर फीस की अदायगी के उपरांत दी जायेगी जो पी.एस.आई.ई.सी. ऑपरेटिव द्वारा तय मौजूदा रिज़र्व कीमत के 10 प्रतिशत के हिसाब से चार्ज की जायेगी।

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