पंजाब

मुख्यमंत्री पंजाब द्वारा स्मार्ट विलेज मुहिम के अधीन तुरंत 383 करोड़ रुपए जारी करने के निर्देश

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चंडीगढ़ – पंजाब सरकार की स्मार्ट विलेज कम्पेंन (एस.वी.सी) को उस समय पर बड़ा प्रोत्साहन मिला जब पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने इस स्कीम के लिए तुरंत 383 करोड़ रुपए जारी करने के लिए वित्त विभाग को निर्देश दिए। ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग की विनती पर पंजाब के मुख्यमंत्री ने राज्यभर के सभी 22 जिलों में इस स्कीम को समय पर लागू करने के लिए विभाग को निर्देश दिए जिससे ग्रामीण इलाकों में बुनियादी ढांचे और सुविधाओं के विकास हो सके और इनका स्तर ऊँचा उठाया जा सके। गौरतलब है कि कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व में मंत्रीमंडल ने 29 जनवरी को स्मार्ट विलेज मुहिम को हरी झंडी दी थी और इससे गाँवों के समूचे विकास के लिए रास्ता सपाट किया था। इस स्कीम का उद्देश्य बुनियादी ढांचे के निर्माण और बुनियादी सहूलतें मुहैया करवाने के लिए सरकार की चल रही स्कीमों को संगठित करके ग्रामीण इलाकों की हालत में सुधार करना है। इन स्कीमों का संगठन इस स्कीम की मुख्य विशेषता होगी और इसके लिए आर.डी.एफ, 14वें वित्त आयोग, मगनरेगा, एस.बी.एम, एन.आर.डी.डब्लयू.पी.आर जैसे विभिन्न स्रोतों से फंड प्राप्त होंगे और यह इन स्कीमों को लागू करने के लिए इस्तेमाल किये जाएंगे। अगर वहाँ कोई अन्य स्कीम होगी जिसके अधीन प्रस्तावित काम किये जा सकते होंगे तो उस स्कीम के फंडों का प्रयोग भी किया जायेगा। जिस मामले में मगनरेगा के तहत काम करवाया जा सकता है, उसे लाजि़मी तौर पर इस स्कीम के साथ जोड़ा जायेगा। जहाँ 14वें वित्त कमिशनर, मगनरेगा आदि जैसी स्कीमों के फंड इस्तेमाल कियेे जा रहे हैं तो वहीँ इस स्कीम के दिशा-निर्देशों के आदेशों का पालन करने के लिए डिप्टी कमिशनर और कार्यकारी एजेंसी द्वारा यकीनी बनाया जायेगा। यह मुहिम इस बुनियाद पर आधारित होगी कि हरेक गाँव बुनियादी ढांचे, सेहत, शिक्षा, वातावरण आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों के विभिन्न लक्ष्यों को प्राप्त करके आगे की और प्रगति करेगी। एस.वी.सी के तहत करवाए जाने वाले कामों को 2 श्रेणियों में बाँटा गया है जिनमें ज़रूरी और इच्छुक श्रेणियां हैं। इस स्कीम के तहत डिप्टी कमिशनर ब्लॉक विकास और पंचायत अफसरों और ज़रुरी कामों के लिए अलग -अलग विभागों से प्रस्ताव प्राप्त करेंगे। 25 लाख रुपए के व्यक्तिगत कामों को डिप्टी कमिशनर पर आधारित कमेटी विचारेगी और स्वीकृत करेगी। इस कमेटी के चेयरमैन डिप्टी कमिशनर और मैंबर सचिव, अतिरिक्त डिप्टी कमिशनर (विकास) हैं। इस कमेटी के दूसरे सदस्यों में जि़ला विकास एवं पंचायत अफ़सर, डिप्टी चीफ़ ऐग्जैक्टिव अफ़सर, जि़ला परिषद और कार्यकारी इंजीनियर ( पंचायती राज) हैं।25 लाख रुपए से अधिक लागत वाले व्यक्तिगत कामों के मामलों में इनको राज्य स्तरीय कमेटी की तरफ से मंजूरी दी जायेगी जिसके ज्वाइंट डिवैल्पमैंट कमिशनर और सुपरींटैंडिंग इंजीनियर (पी.आर.सी) एस.ए.एस.नगर क्रमवार चेयरमैन और मैंबर सचिव हैं। कमेटी के दूसरे सदस्यों में डायरैक्टर ग्रामीण विकास एवं पंचायत, चीफ़ इंजीनियर (पंचायती राज) और डिप्टी कंट्रोलर (एफ.एंड.ए) शामिल हैं।कार्यकारी एजेंसी का चयन और फ़ैसले के लिए डी.सी समर्थ अधिकारी होंगे चाहे वह पंचायत, पंचायत समिति, जि़ला परिषद या राजय सरकार के किसी अन्य प्रशासकीय विभाग के हों। डी.सी कार्यकारी एजेंसी को दो बराबर किश्तों में फंड जारी करेंगे। दूसरी किश्त डिप्टी कमिशनर द्वारा कार्यकारी एजेंसी को उस समय पर जारी की जायेगी जब पहली किश्त के प्रयोग संबंधी सर्टिफिकेट पेश किया जायेगा।सभी गाँवों के एक सर्वे के आधार पर गाँवों को ग्रेड /रंैक दिए जाएंगे जिसके लिए विस्तृत दिशा-निर्देश बाद में ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग द्वारा नोटीफायी किये जाएंगे। जिले के सभी गाँवों में सुविधाओं के मौजूदा स्तर संबंधी सर्वेक्षण के बाद हरेक जि़ला सभी गाँवों के लिए एक पैमाना होगा।

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