संसार
अमेरिका में 129 भारतीय एडमिशन घोटाले में गिरफ्तार
बुधवार को 200 से ज्यादा भारतीय छात्रों को हिरासत में लिया गया था
वॉशिंगटन-अमेरिका
में एडमिशन घोटाले में 129 भारतीय गिरफ्तार, छोड़े गए छात्रों को लगाई
ट्रैकिंग डिवाइस। अमेरिका में एडमिशन घोटाले में 130 विदेशी छात्रों को
गिरफ्तार किया गया है, जिसमें 129 भारतीय हैं। अमेरिका में मान्य
दस्तावेजों के बिना रह रहे लोगों को पकड़ने के लिए गृह विभाग ने एक फेक
यूनिवर्सिटी बनाई थी। दावा है कि हिरासत के दौरान कई छात्रों को ट्रैकिंग
डिवाइस लगाई गई थी। उन्हें सीमा से बाहर न जाने को कहा गया था। 200 से
ज्यादा छात्रों को हिरासत में लिया गया था।आव्रजन घोटाले का पता लगाने के
लिए अमेरिकी गृह विभाग ने डेट्रॉइट के फारमिंगटन हिल्स में एक फेक
यूनिवर्सिटी स्थापित की। आव्रजन घोटाले का पता लगाने के लिए अमेरिकी गृह
विभाग ने डेट्रॉइट के फारमिंगटन हिल्स में एक फेक यूनिवर्सिटी स्थापित की।
इमिग्रेशन अटॉर्नी का दावा- गिरफ्तार किए गए युवाओं को यूनिवर्सिटी के फेक
होने की जानकारी ही नहीं थी।
उधर, इमिग्रेशन अटॉर्नी ने दावा किया
है कि गिरफ्तार किए गए युवाओं को यूनिवर्सिटी के फेक होने की जानकारी ही
नहीं थी। इस बात की आलोचना की गई है कि छात्रों को पकड़ने के लिए इस तरह की
योजना बनाई गई। अमेरिका में मान्य दस्तावेजों के बिना रह रहे लोगों को पकड़ने के लिए गृह विभाग ने एक फेक यूनिवर्सिटी बनाई थी।
फेडरल
प्रॉसिक्यूटर के मुताबिक, आव्रजन घोटाले का पता लगाने के लिए अमेरिकी गृह
विभाग ने डेट्रॉइट के फारमिंगटन हिल्स में एक फेक यूनिवर्सिटी स्थापित की।
अफसरों ने इसे पे टू स्टे स्कीम करार दिया। विदेशी छात्रों ने फेक
यूनिवर्सिटी में इसलिए एडमिशन कराया ताकि वे गलत तरीके से स्टूडेंट वीजा का
दर्जा हासिल कर सकें।
इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फोर्समेंट (आईसीई)
के प्रवक्ता खालिद वाल्स ने बताया कि आव्रजन नियमों का उल्लंघन करने के लिए
130 विदेशियों को गिरफ्तार किया गया जिनमें 129 भारतीय हैं। आईसीई ने ये
गिरफ्तारियां बुधवार को की थीं। इसी दिन 8 अन्य लोगों पर वीजा फ्रॉड का
आरोप लगाया गया था।
डेट्रॉइट फ्री प्रेस के मुताबिक- 8 लोगों पर
आपराधिक रूप से वीजा फ्रॉड की साजिश रचने का आरोप लगाया गया जबकि 130
छात्रों पर केवल सिविल इमिग्रेशन का आरोप लगा।
वकीलों के मुताबिक,
130 लोगों को न्यूजर्सी, अटलांटा, ह्यूस्टन, मिशिगन, कैलिफोर्निया,
लुइसियाना, नॉर्थ कैरोलिना और सेंट लुइ से गिरफ्तार किया गया। सभी छात्र
स्टूडेंट वीजा पर वैध तरीके से अमेरिका आए थे और उन्हें फारमिंगटन
यूनिवर्सिटी में ट्रांसफर किया गया था।फेडरल प्रॉसिक्यूटर ने बताया कि
छात्रों को इस बात की जानकारी थी कि यूनिवर्सिटी कानूनी तरीके से संचालित
नहीं की जा रही। बचाव पक्ष के वकीलों ने सरकार की इस दलील को गलत बताया है।
अटलांटा
के इमिग्रेशन अटॉर्नी रवि मन्नन ने बताया कि फेक (फारमिंगटन) यूनिवर्सिटी
ने छात्रों से वादा किया था कि वह उनकी पूर्व की मास्टर्स डिग्री को
मान्यता देगी। फारमिंगटन ने छात्रों से यह भी कहा था कि अगर वे दाखिल होते
हैं तो उन्हें काम करने की अनुमति मिलेगी। छात्रों को लगा कि यह एक अधिकृत
यूनिवर्सिटी है और उन्हें वर्क प्रोग्राम के लिए एफ-1 वीजा मिल जाएगा। इसे
करिकुलर प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (सीपीटी) वीजा भी कहा जाता है।
पुलिस ने
मामले का पता लगाने के लिए हिरासत के दौरान भारतीय छात्रों को एड़ी में एक
ट्रेकिंग डिवाइस लगाई थी और उन्हें एक तय सीमा से बाहर न जाने के लिए कहा
था। पुलिस ने छात्रों को बैटरी भी दी थी ताकि डिवाइस के डिस्चार्ज होने पर
उसे चार्ज किया जा सके।
भारतीय विदेश विभाग के प्रवक्ता रवीश कुमार
ने कहा, “हमें पूरे मामले की जानकारी है। वॉशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास
और अन्य वाणिज्यिक दूतावासों से डिटेल मंगाए जा रहे हैं। छात्रों की मदद के
लिए भारतीय समुदाय के लोगों को वहां भेजा गया है। छात्रों की मदद के लिए
एक नोडल ऑफिसर की भी नियुक्ति की गई है।”