पंजाब
श्री गुरू नानक देव जी से सम्बन्धित स्थानों का पुरातन और विरासती रूप बरकरार रखा जाए: नवजोत सिंह सिद्धू
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पाक के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को पत्र लिखकर की मांग
चंडीगढ़ – संसार भर में नाम जपने, काम करने और बाँटकर खाने का संदेश देने वाले सिख धर्म के मुखी श्री गुरु नानक देव जी से सम्बन्धित स्थानों के पुरातन और विरासती रूप को बनाए रखने के लिए पंजाब के स्थानीय निकाय, पर्यटन और सांस्कृतिक मामलों बारे मंत्री स. नवजोत सिंह सिद्धू ने भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को पत्र लिखे हैं। उन्होंने विनती की है कि श्री गुरु नानक देव जी की चरण स्थली करतारपुर साहिब और डेरा बाबा नानक गुरुद्वारा साहिब और इनके पास के इलाकों की पवित्रता और पुरातन रूप हूबहू बरकरार रखी जाये और इन स्थानों को ‘विरासती गाँव’ का दर्जा दिया जाये। स. सिद्धू की तरफ से श्री मोदी और इमरान ख़ान को लिखे पत्रों में विनती की गई है कि श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के मद्देनजऱ दोनों मुल्कों की सरकारों की तरफ से कराए जाने वाले विकास कार्यों के लिए योजनाबंदी की जा रही है। गुरू साहिब से सम्बन्धित स्थानों का विकास ऐसे ढंग से किया जाये कि उस जगह की महत्ता, पवित्रता और पुरातनता भंग न हो जिससे संगत गुरू साहिब और उनके समय को पास से महसूस कर सके। उन्होंने कहा कि संगत या सैलानियों की सुविधा के नाम पर रुहानियत के प्रतीक इन पवित्र स्थानों को संगमरमर में मढक़र कंक्रीट का जंगल न बनाया जाये। स. सिद्धू ने लिखा है कि जिस धरती पर बाबा नानक जी ने अपने जीवन के 18 वर्ष बिताए और जिस धरती को बाबा नानक जी ने आप जोता और सींचा उस ज़मीन में कोई निर्माण न किया जाये बल्कि इस जऱखेज़ मिट्टी में जैविक खेती की जाये और इसमें उगाई गई फ़सल का लंगर तैयार करके संगत को छकाया जाये। उन्होंने माँग की कि इस स्थान के दर्शनों के लिए आने वाली संगत को वाहनों का बिल्कुल भी प्रयोग न करने दिया जाये। वाहनों के प्रयोग की आज्ञा केवल बुज़ुर्गों, अंगहीनों या बीमार लोगों को करने दिया जाये। यहाँ आने वाली संगत को सभी ज़रूरी बुनियादी सहूलतें मुहैया करवाई जाएँ और इन स्थानों के पास के बाज़ारों में पुरातन और विरासती वस्तुएँ लाए जाने को उत्साहित किया जाये। उन्होंने माँग की कि इन पवित्र स्थानों के नज़दीक शॉपिंग कंपलैक्स न खुलने दिए जाएँ, जिनमें फास्ट -फूड प्लास्टिक के बर्तनों में परोसे जाते हैं। उन्होंने दोनों मुल्कों के प्रधान मंत्रियों को विनती की कि इन स्थानों को इस तरीके से विकसित किया जाये कि आज की और आने वाली पीढ़ी गुरू साहिब जी के सादे जीवन से दिशा ले सके।