पंजाब
बदनौर द्वारा सरुशटी ढोके की लिखी किताब ‘टैमारिंड एक’ का विमोचन
चंडीगढ़ – राज्यपाल पंजाब और चंडीगढ़ के प्रबंधक श्री वी.पी. सिंह बदनौर ने आज पंजाब राज भवन में मिस सरुशटी ढोके द्वारा लिखी और रूपा पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित की गई किताब ‘टैमारिंड एक’ का विमोचन किया। 18 वर्ष की नौजवान लेखिका सरुशटी को अपनी पहली प्रकाशित किताब के लिए बधाई देते हुए राज्यपाल ने कहा कि टैमारिंड पढऩे के लिए एक दिलचस्प किताब होगी क्योंकि इसमें ग्रामीण और शहरी जीवन की तुलना को बहुत स्पष्ट रूप में दिखाया गया है। उन्होंने बताया कि शहरों के मुकाबले गाँवों में लोगों के नज़दीकी और भावनात्मक सम्बन्ध ज़्यादा होते हैं।लेखिका के अनुसार, टैमारिंड असली जीवन की घटनाओं पर आधारित एक काल्पनिक कहानी है जो उसके साथ घटी है। इसके दादा-दादी महाराष्ट्र के एक गाँव में रहते थे और वह हर साल अपने परिवार के साथ उनको मिलने जाती थी। वह उसको गाँव बारे, उनके जीवन से सम्बन्धित और उनके आस-पास रहते और लोगों की कहानियाँ सुनाया करते थे। उसके माता -पिता भी उनके बचपन और उनके हालातों बारे कई कहानियां सुनाते थे, जिन हालातों का सामना करके वह अपने वर्तमान स्थिति में पहुँचे हैं।अपनी, यादों संबंधी लिखने से पहले, लेखिका ने तीन गाँवों का सर्वे किया, जहाँ उसने निजी तौर पर 60 किसानों और उनके परिवारों से बातचीत की और उनके जीवन एवं रोज़ी-रोटी संबंधी भी बातचीत की। अपनी खोज के साथ इन्होंने सभी कहानियों को मिलाकर उसने महसूस किया कि महाराष्ट्र के ग्रामीण जीवन को उस ढंग से पेश करने की ज़रूरत है जिस ढंग से लोग वास्तव में वहाँ रहते हैं।इस किताब में सरुशटी ने रसूख़दारों द्वारा हमारे किसानों की पैदावार को बर्बाद किये जाने जैसे गंभीर मुद्दों को उभारा है। यह किताब कजऱ्े के बोझ तले दबे किसानों, स्कूलों की ख़स्ता हालातों, अध्यापकों में बढ़ रहे राजनैतिक रुझान, लड़कियों को स्कूलों से हटा कर छोटी उम्र में विवाह करने, पैसों की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित और संताप भोग रहे लोगों, पढऩे की जगह केवल मिड्ड डे मील की ललक के लिए स्कूल जाते बच्चों आदि त्रासदी भरे मसलों की कहानी कहती है। यह सभी मुद्दे एक परिवार के चार सदस्यों, शिवा,यशोदा, कविता और रघू नामों के किरदारों के साथ उभारे गए हैं, जो पीढिय़ों से गाँवों में ऐसी दयनीय और दुर्भाग्य भरी जि़ंदगी जीने के लिए मजबूर हैं। किताब में यह किरदार गाँव छोड़ कर जाने की विचारधारा के उलट कठिन समय से डट कर जूझने के भावों को पेश करते हैं।‘टैमारिंड एक’ एक ऐसी कहानी है जो चाहे सच्ची तो नहीं परन्तु सच्ची की जा सकती है। रस्किन बाँड के मुताबिक यह किताब पुराने ज़माने के प्यार और जि़ंदगी की सांझ को मशहूर करती है और इसके साथ ही बचपन की मौज मस्तियों, दिलों में पड़े फासले और रूखेपन, कड़वी सच्चाइयों को भी किताब में जगह दी गई है।इस मौके पर अन्य आदरणीयों के अलावा श्री जे.एम बालामुरगन, प्रमुख सचिव राज्यपाल श्री डी.के तिवाड़ी, प्रमुख सचिव, श्री राकेश वर्मा, सचिव, श्रीमती जसप्रीत तलवार, सचिव, श्री हरदीप सिंह ढिल्लों, डीजीपी, कानून और व्यवस्था,पंजाब, श्री आर.एन ढोके , एडीजीपी सुरक्षा, श्री ईश्वर सिंह, एडीजीपी, कानून और व्यवस्था और श्री खुशवंत सिंह, सूचना कमिशनर, पंजाब सरकार के कई अन्य उच्च अधिकारी मौजूद थे।