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जेट एयरवेज से बैंक परेशान

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जेट एयरवेज को कर्ज देने वाले बैंक उलझन में हैं। उनसे जल्द ऐसी डील की उम्मीद की जा रही है, जिससे जेट कामकाज जारी रख सके। इस मामले पर आला सरकारी अफसरों से बैंकों की बातचीत हुई है। इसमें बैंकों को इशारा दिया गया कि जेट में एतिहाद के फंड लगाने के मामले में वे उसके साथ नरमी बरतें। कंपनी को बचाने के लिए तुरंत फंड की जरूरत है। नरेश गोयल की जेट एयरवेज में एतिहाद विदेशी पार्टनर है।

एतिहाद प्रेफरेंशल शेयरों की कीमत पर ढील चाहती है। फंडिंग के लिए जेट उसे ये शेयर इशू करेगी। दरअसल, इस डील से जेट पर मालिकाना हक बदलेगा और नियम के हिसाब से एतिहाद को भारतीय कंपनी के शेयरहोल्डर्स के लिए ओपन ऑफर लाना होगा। एतिहाद इसी को लेकर नरमी चाहती है। वह जेट के लिए कोई गारंटी नहीं देना चाहती। एतिहाद ने यह भी कहा कि जेट में उसके हिस्से के शेयरों पर कोई दावा नहीं करेगा।

पब्लिक सेक्टर बैंक के एक आला अधिकारी ने बताया, ‘सरकार चाहती है कि बैंक विदेशी कंपनी को यह ढील दे। इसकी वजह या तो अबू धाबी के साथ राजनयिक रिश्ते हो सकते हैं या सरकार किंगफिशर के बाद एक और एयरलाइन कंपनी को बंद होते नहीं देखना चाहती। हमें स्थिति की गंभीरता का अंदाजा है। हालांकि, ये बातें लिखित में हमसे नहीं कही गई हैं। बैंकों से रियायत की उम्मीद केंद्र में नई सरकार बनने से कुछ महीने पहले की जा रही है। कोई बैंकर नहीं चाहता कि पहले लिए गए फैसलों पर सरकारी एजेंसियां उससे बाद में पूछताछ करें। कुछ बैंक इस पर उलझन में हैं, लेकिन हमें जल्द ही कोई स्टैंड लेना होगा।’

प्रेफरेंशल इशू का फ्लोर प्राइस दो या 26 हफ्ते के स्टॉक प्राइस के एवरिज के हिसाब से निकाला जाता है। इसमें जिस मामले में अधिक कीमत होगी, उसे फ्लोर प्राइस माना जाएगा। एतिहाद जैसे विदेशी निवेशक के लिए प्राइसिंग पर छूट के लिए रिजर्व बैंक से मंजूरी लेनी पड़ेगी। इस बीच पिछले दो हफ्तों में कंपनी के शेयर प्राइस में 6 पर्सेंट की तेजी आई है।

अगर जेट एयरवेज बंद होती है तो लोकसभा चुनाव से पहले सरकार की छवि पर दाग लगेगा। भले ही संस्थापक नरेश गोयल की गलतियों की वजह से ऐसा होगा। सरकार ने 2014 में स्पाइसजेट को तबाही के कगार से उबरने में मदद की। वह नहीं चाहती कि जेट एयरवेज का हश्र भी किंगफिशर जैसा हो।

जेट एयरवेज को बचाने के लिए सरकार बड़ी छूट तो नहीं देगी, लेकिन वह भरोसेमंद निवेशक लाने में मदद कर सकती है। टाटा ग्रुप ने जेट को खरीदने का ऑफर ठुकरा दिया है, इसलिए कंपनी के पास बहुत कम विकल्प बचे हैं। अभी के हालात में एतिहाद ही जेट की सबसे योग्य रक्षक दिख रही है। उसके पास फर्स्ट रिफ्यूजल का अधिकार भी है। इसका मतलब यह है कि एतिहाद के मना करने के बाद ही जेट के प्रमोटर्स किसी अन्य को स्टेक ऑफर कर सकते हैं।

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