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माल्या की संपत्ति कुर्क करने की इजाजत दें, बैंकों की कोर्ट से गुहार

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एसबीआई के नेतृत्व में 12 बैंकों के समूह ने मुंबई की एक अदालत में आवेदन देकर मांग की है कि विजय माल्या की वे ऐसेट्स रिलीज की जाएं, जिन्हें जांच एजेंसी एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) ने जब्त कर लिया है। बैंकों ने कहा है कि ऐसा होने पर वे इन ऐसेट्स को ‘तुरंत’ बेचकर इनकी अधिक से अधिक वैल्यू हासिल कर पाएंगे।

संयुक्त आवेदन में इन बैंकों ने अदालत से अनुरोध किया है कि भगोड़ा आर्थिक अपराधी करार दिए जा चुके माल्या की ऐसेट्स रेस्टोर की जाएं ताकि बिना देर किए वे उन्हें बेचकर उचित रकम हासिल कर सकें।

शीघ्रता से कदम उठाने पर जोर देते हुए बैंकों ने कहा है कि अटैच की गईं संपत्तियों पर ‘बाजार में उतार-चढ़ाव का असर पड़ेगा और उन ऐसेट्स को बेचने में देर होने से उनकी वैल्यू कम हो सकती है।’ उन्होंने कहा है कि ‘बेस्ट वैल्यू हासिल करने के लिए इन ऐसेट्स को तत्काल बेचे जाने की जरूरत है।’ बैंकों ने अदालत से अनुरोध किया है कि उनकी यह मांग ‘इकॉनमी और बैंकिंग सिस्टम के हित में मान ली जाए, जिनके सामने फंसे हुए एनपीए के कारण गंभीर स्थिति बन गई है।’

आवेदन में यह भी कहा गया है कि ‘अपराधी घोषित किए जा चुके माल्या की संपत्ति अटैच करने के सरकार के अधिकार के मुकाबले बैंकों का अधिकार ज्यादा है।’ इस आवेदन में कहा गया है कि अगर कोर्ट अटैचमेंट ऑर्डर हटा दे तो डेट रिकवरी ट्राइब्यूनल, बेंगलुरु के रिकवरी ऑफिसर के जरिए बैंक इन ऐसेट्स की कुर्की कर पाएंगे और रकम हासिल कर सकेंगे। इसमें कहा गया है कि ‘जिस पैसे की रिकवरी की बात की जा रही है, वह सार्वजनिक धन है’ और यह ऐक्शन लेकर बैंक ‘जनहित की ही रक्षा कर रहे हैं।’

ईडी के अनुरोध पर कोर्ट ने 11 नवंबर 2016 को माल्या की ऐसेट्स अटैच कर दी थीं। बैंकों ने किंगफिशर एयरलाइन लिमिटेड, यूनाइटेड ब्रुअरीज होल्डिंग्स लिमिटेड, विजय माल्या और किंगफिशर फिनवेस्ट इंडिया लिमिटेड से जुड़ी सभी प्रॉपर्टीज पर अपना ‘वैध’ दावा होने की बात की है। बैंकों का दावा है कि माल्या पर उनके 6,230 करोड़ रुपये और इस पर 11.50 प्रतिशत की दर से ब्याज बकाया हैं, जैसा कि डीआरटी ने फरवरी 2017 में कहा था।

आवेदन में कहा गया है कि कोर्ट ने अगर ये प्रॉपर्टीज डिटैच कर बैंकों को उनकी कुर्की करने और अपना बकाया रिकवर करने की इजाजत नहीं दी तो बैंकों के अधिकारों को ‘अपूरणीय नुकसान’ होगा।

बैंकों ने दावा किया है कि माल्या ने 21 दिसंबर 2010 को उन्हें जो पर्सनल गारंटी दी थी, उसी आधार पर माल्या की ऐसेट्स पर उनका अधिकार बनता है। उन्होंने दावा किया है कि माल्या की ऐसेट्स पर उन्होंने कदम बढ़ा दिए हैं, लेकिन कोर्ट के नवंबर 2016 के अटैचमेंट ऑर्डर के कारण वे आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।

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