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आर्थिक आरक्षण शीतकालीन सत्र की सबसे बड़ी उपलब्धि

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सरकार ने कहा,आर्थिक रूप से पिछड़ों को 10 प्रतिशत आरक्षण संबंधी संविधान संशोधन विधेयक का पारित होना शीतकालीन सत्र की सबसे बड़ी उपलब्धि, सिर्फ पांच ही विधेयकों को मिल पाई दोनों सदनों की मंज़ूरी, विपक्षी दलों से एक बार फिर की तीन तलाक मुद्दे पर राजनीति न करने की अपील।

संसद के शीतकालीन सत्र के संपन्न होने पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए संसदीय कार्य मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने  कहा कि इस सत्र की सबसे बड़ी उपलब्धि 124वां संविधान संशोधन है। जिसमें सामान्य वर्ग को आर्थिक आधार पर 10 प्रतिशत आरक्षण का रास्ता साफ होने से संसद का यह शीतकालीन सत्र ऐतिहासिक माना जाएगा।

संसदीय कार्य मंत्री ने विपक्ष से तीन तलाक बिल पर राजनीति नहीं की अपील की। उन्होंने कहा कि इस परंपरा से मुस्लिम महिलाओं को काफी परेशानी होती है। तोमर ने कहा कि लोकसभा में तीन तलाक बिल पारित हो चुका है और परिस्थितियों के मुताबिक सरकार राज्यसभा में भी फ़ैसला लेगी।

शीतकालीन सत्र के कामकाज को देखे तो लोकसभा की 17 बैठकों में 47 फीसदी कामकाज हुआ वहीं राज्यसभा की 18 बैठकों में कुल 27 फ़ीसदी कामकाज ही हो पाया।दोनों सदनों के द्वारा कुल 5 विधेयक पारित हुए जिसमें लोकसभा में 14 और राज्यसभा में मात्र 4 विधेयक ही पारित हो पाए।

दोनों सदनों से पारित महत्वपूर्ण विधेयकों में 124 वां संविधान संशोधन जिसमें सामान्य सामान्य वर्ग को आर्थिक आधार पर 10 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान और निशुल्कऔर अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार संशोधन विधेयक खास रहे। वहीं लोकसभा से मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण,आधार संशोधन विधेयक, नागरिक संशोधन विधेयक और उपभोक्ता संरक्षण विधेयक अहम रहे।शीतकालीन सत्र में 3 विधेयक ऐसे रहे जिन पर सरकार अध्यादेश लाई थी लेकिन वे पारित नहीं हो सके। 

सरकार ने कहा,आर्थिक रूप से पिछड़ों को 10 प्रतिशत आरक्षण संबंधी संविधान संशोधन विधेयक का पारित होना शीतकालीन सत्र की सबसे बड़ी उपलब्धि, सिर्फ पांच ही विधेयकों को मिल पाई दोनों सदनों की मंज़ूरी, विपक्षी दलों से एक बार फिर की तीन तलाक मुद्दे पर राजनीति न करने की अपील।

संसद के शीतकालीन सत्र के संपन्न होने पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए संसदीय कार्य मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने  कहा कि इस सत्र की सबसे बड़ी उपलब्धि 124वां संविधान संशोधन है। जिसमें सामान्य वर्ग को आर्थिक आधार पर 10 प्रतिशत आरक्षण का रास्ता साफ होने से संसद का यह शीतकालीन सत्र ऐतिहासिक माना जाएगा।

संसदीय कार्य मंत्री ने विपक्ष से तीन तलाक बिल पर राजनीति नहीं की अपील की। उन्होंने कहा कि इस परंपरा से मुस्लिम महिलाओं को काफी परेशानी होती है। तोमर ने कहा कि लोकसभा में तीन तलाक बिल पारित हो चुका है और परिस्थितियों के मुताबिक सरकार राज्यसभा में भी फ़ैसला लेगी।

शीतकालीन सत्र के कामकाज को देखे तो लोकसभा की 17 बैठकों में 47 फीसदी कामकाज हुआ वहीं राज्यसभा की 18 बैठकों में कुल 27 फ़ीसदी कामकाज ही हो पाया।दोनों सदनों के द्वारा कुल 5 विधेयक पारित हुए जिसमें लोकसभा में 14 और राज्यसभा में मात्र 4 विधेयक ही पारित हो पाए।

दोनों सदनों से पारित महत्वपूर्ण विधेयकों में 124 वां संविधान संशोधन जिसमें सामान्य सामान्य वर्ग को आर्थिक आधार पर 10 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान और निशुल्कऔर अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार संशोधन विधेयक खास रहे। वहीं लोकसभा से मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण,आधार संशोधन विधेयक, नागरिक संशोधन विधेयक और उपभोक्ता संरक्षण विधेयक अहम रहे।शीतकालीन सत्र में 3 विधेयक ऐसे रहे जिन पर सरकार अध्यादेश लाई थी लेकिन वे पारित नहीं हो सके। 

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