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रफाल पर विपक्ष के आरोपों को सरकार ने किया खारिज

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लोकसभा में राफेल विमान सौदे को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच गंभीर बहस हुई, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने संसद में राफेल को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा, वहीं, वित्त मंत्री अरूण जेटली ने विपक्ष के तमाम आरोपों का सिलसिलेवार ढंग से उत्तर दिया। वित्त मंत्री ने कांग्रेस की कुछ बुनियादी ग़लतियों की ओर इशारा किया मुद्दे पर विपक्ष की राजनीति पर गंभीर सवाल खड़े किए।

बुधवार को रफाल सौदे से जु़डे मसले पर लोकसभा में बहस हुई तो तमाम पक्षों ने अपनी अपनी बात रखी। इस मसले पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लगाए तमाम आरोपों को  झूठा’ बताते हुए वित्त मंत्री अरूण जेटली ने  यूपीए सरकार पर देश की सुरक्षा से समझौता करने का आरोप लगाया । जेटली ने कहा कि कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन्हें स्वभाविक रूप से सचाई नापसंद होती है। उन्हें सिर्फ पैसे का गणित समझ में आता है, देश की सुरक्षा का नहीं। इससे पहले चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि देश इस बारे में कुछ सवालों के जवाब चाहता है और जेपीसी की जांच होनी चाहिए ।

जेपीसी की मांग को खारिज करते हुए वित्तमंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी सौदे को सही पाया है। बोफोर्स मसले की जेपीसी का हवाला देते हुए जेटली ने कहा कि लोग जेपीसी की मांग कर रहे हैं ताकि एक स्वच्छ सरकार के खिलाफ मामला गढ़ने का मौका मिल सके। लोकसभा में चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए जेटली ने विपक्ष के उठाए हर सवाल का सिलसिलेवार ढंग से जवाब दिया। सौदे में  पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया। अनुबंधन वार्ता समिति, कीमत वार्ता समिति आदि की 74 बैठकें हुई । उच्चतम न्यायालय को इसकी जानकारी दी गई । इसके बाद यह रक्षा खरीद परिषद में गया और फिर सुरक्षा संबंधी मंत्रिमंडल समिति की मंजूरी ली गई । सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि हम प्रक्रिया से संतुष्ट हैं और किसी तरह की दिक्कत नहीं है । 

वित्त मंत्री ने कहा कि 2016 में जो सौदा हुआ, उसके आधार पर बिना हथियारों का के विमान  का दाम यूपीए की कीमत से नौ प्रतिशत कम था और हथियारों से युक्त विमान की बात करें तब यह यूपीए की तुलना में भी 20 प्रतिशत सस्ता था ।  दाम के मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि है कि अपनी अंतरात्मा को संतुष्ट करने के लिए हमने सरकार से दाम मंगाकर देखा और अंतर्रात्मा को संतुष्ट करने के बाद हमें लगा का दाम में दखल की जरुरत नहीं है। अरुण जेटली ने कहा कि  औद्योगिक घराने को लाभ देने का आरोप गलत है । कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष को आफसेट का पता नहीं है, यह दुख की बात है। उन्होंने कहा कि कुल आफसेट 29 हजार करोड़ रूपये का और आरोप 1.30 लाख करोड़ रूपये का लगाया जा रहा है। आफसेट तय करने का काम विमान तैयार करने वाली कंपनी का है।  

अरुण जेटली ने कहा कि एचएएल 2.7 गुणा अधिक समय मांग रही थी। फौज जल्द विमान मांग रही थी। इसलिए सौदा एचएएल को नहीं मिला। वित्त मंत्री ने कहा कि रफाल  विमान के बारे में में उच्चतम न्यायालय संतुष्ट हो गया लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष की चुनावी जरूरत संतुष्ट नहीं हुई। 

वित्त मंत्री ने विस्तार से रफाल सौदे के बारे में बताया और देश को जानकारी दी कि रफाल देश के लिए क्यों जररी है। साथ ही उन्होने बताया कि कैसे यूपीए सरकार ने सौदे को लंबे समय तक लटकाए रखा जबकि एनडीए सरकार ने देश के लिए इस जरुरी सौदे को अंजाम तक पहुंचाया।

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