संसार
श्रीलंका में सरकार गठन की कोशिशें तेज
श्रीलंका की सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना को झटका दिया। संसद को भंग करने की अधिसूचना को निरस्त किया। सात न्यायाधीशों की खंडपीठ ने संसद को भंग करने को अवैध और असंवैधानिक बताया।
श्रीलंका की सुप्रीम कोर्ट की ओर से संसद को भंग नहीं करने का आदेश देने के बाद वहां एक बार फिर से सरकार बनाने की कोशिशें तेज़ हो गई है। राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरिसेना ने कल शाम अपनी पार्टी के सांसदों के साथ बैठक की। बताया जाता है कि इस बैठक में नई सरकार को लेकर जोरदार चर्चा हुई। राष्ट्रपति ने सांसदों से कहा कि जल्द ही नई कैबिनेट गठित की जा सकती है और अगले सोमवार तक नई सरकार बन सकती है। इस बैठक में महिंदा राजपक्षे की सरकार और सभी अन्य सांसदों ने हिस्सा लिया। एक अन्य मंत्री ने कहा कि निचली अदालत के फैसले को लेकर उनकी याचिका पर वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करेंगे। जिस फैसले की वजह से पिछले हफ्ते से उनलोगों के काम करने पर रोक लगी है।
अभी यह तस्वीर साफ नहीं हुई है कि हटाए गए प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे अपने पद से इस्तीफा देंगे या नहीं। इससे पहले श्रीलंका की सुप्रीम कोर्ट ने संसद को भंग कर समय से पहले चुनाव कराने के राष्ट्रपति के फैसले पर रोक लगा दी थी। अदालत ने कहा था कि फैसला संविधान की परिधि के अनुकूल नहीं है। सात न्यायधीशों की पीठ ने एकमत से यह फैसला दिया था कि संसद को निर्धारित अवधि से चार साल छह महीने भंग करना गैर कानूनी है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए रनिल विक्रमसिंघे ने कहा कि उन्हें यकीन है कि राष्ट्रपति इस फैसले को स्वीकार करेंगे। दूसरी तरफ राजपक्षे ने कहा कि वह जल्दी चुनाव कराने के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।