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सैन्य आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर भारत और चीन में बनी सहमति

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बीजिंग – डोकलाम गतिरोध के एक साल बाद भारत और चीन के बीच पहली रक्षा और सुरक्षा वार्ता हुई। इसमें दोनों देशों में सैन्य आदान-प्रदान और वार्ता को बढ़ावा देने पर सहमति बनी। बता दें कि पिछले साल डोकलाम में दोनों देशों की सेनाएं 73 दिनों तक आमने-सामने थीं। इस गतिरोध के चलते पिछले साल भारत और चीन में यह सालाना वार्ता नहीं हुई थी।
भारत और चीन के शीर्ष अधिकारियों के बीच नौवीं सालाना रक्षा और सुरक्षा वार्ता यहां गत मंगलवार को हुई। इस वार्ता में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुआई रक्षा सचिव संजय मित्रा ने की जबकि चीनी पक्ष का नेतृत्व केंद्रीय सैन्य आयोग के ज्वाइंट स्टॉफ विभाग के उप प्रमुख ने किया। बीजिंग में स्थित भारतीय दूतावास ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि दोनों पक्ष रक्षा आदान-प्रदान और दोनों सेनाओं के बीच विविध स्तर की वार्ताओं को बढ़ावा देने पर सहमत हुए हैं।
मित्रा ने बुधवार को चीन के स्टेट काउंसलर और रक्षा मंत्री वेई फेंग से मुलाकात की। मित्रा के साथ रक्षा मंत्रालय के अलावा तीनों सेनाओं थल, वायु और नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी भी चीन दौरे पर गए थे। दोनों देश इस बात पर भी सहमत हुए हैं कि अगले दौर की रक्षा वार्ता साल 2019 में भारत में होगी।
सीमा वार्ता 23 से 24 नवंबर को
रक्षा वार्ता के बाद अब दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच चीन के दुजिआंग्यान शहर में 23 से 24 नवंबर तक 21वें दौर की सीमा वार्ता होगी। सीमा वार्ता के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीनी स्टेट काउंसलर व विदेश मंत्री वांग यी को विशेष प्रतिनिधि बनाया गया है।

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