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पाकिस्तान में ईश-निंदा के आरोप में आसिया बीबी को राहत
पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय ने ईश-निन्दा के आरोप में गिरफ़्तार एक ईसाई महिला, आसिया बीबी द्वारा 2015 में दायर की गई एक अपील को स्वीकार करके उसकी मौत की सज़ा पर रोक लगा दी है.
अपने पड़ोसियों के साथ विवाद के दौरान इस्लाम का अपमान करने के आरोप में 47 वर्षीय आसिया बीबी को 2010 में दोषी करार दिया गया था.
पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश साकिब निसार की अगुवाई वाली शीर्ष अदालत की तीन सदस्यीय पीठ ने बुधवार सुबह अपना फैसला सुनाया. मुख्य न्यायाधीश ने फैसले में कहा, ‘याचिकाकर्ता की तरफ से कथित ईशनिंदा मामले में अभियोजन की तरफ से पेश साक्ष्य को ध्यान में रखते हुए यह स्पष्ट है कि अभियोजन अपने मामले को साबित करने में विफल रहा है.’
उन्होंने कहा कि बीबी अगर अन्य मामलों में वांछित नहीं हैं तो लाहौर के निकट शेखुपुरा जेल से उन्हें तुरंत रिहा किया जा सकता है.
निसार ने फैसला पढ़ते हुए कहा, ‘उनकी दोष सिद्धि को खारिज किया जाता है और अन्य मामलों में अगर ज़रूरत नहीं है, तो उन्हें तुरंत रिहा किया जाए.’
न्यायाधीश ने कहा, ‘इस्लाम में सहिष्णुता मूल सिद्धांत है.’ उन्होंने कहा कि धर्म अन्याय और अत्याचार की निंदा करता है.
आसिया बीबी पर 2009 में ईश-निंदा का आरोप लगा था और 2010 में निचली अदालत ने उन्हें दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई थी, जिसे 2014 में लाहौर उच्च न्यायालय ने बरकरार रखा था.