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भारत और जापान के बीच छह समझौतों पर हस्ताक्षर

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे की सोमवार को हुई शिखर वार्ता के बाद भारत और जापान ने एक हाई स्पीड रेल परियोजना और नौसेना सहयोग समेत छह समझौतों पर हस्ताक्षर किए तथा टू-प्लस-टू वार्ता करने पर सहमति जताई. शिखर वार्ता में दोनों ने भारत-प्रशांत क्षेत्र के हालात समेत विभिन्न द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की गई.

गर्मजोशी के साथ हाथ मिलाते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके जापानी समकक्ष शिंजो आबे ने सामरिक और वैश्विक साझेदारी की मजबूत मिसाल पेश की. इसके साथ ही भारत और जापान के बीच 13वीं शिखर वार्ता ठोस नतीजों के सामने के बाद खत्म हो गई.

भारत-जापान के बीच भविष्य के साझा दृष्टिकोणों को रेखांकित करने वाले 32 दस्तावेजों सहित छह समझौतों का आदान-प्रदान किया गया. दोनों देशों के बीच मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना के लिए ओडीए कर्ज की दूसरी किश्त पर समझौता हुआ. इसके साथ ही आयुष्मान भारत से जुड़ी स्वास्थ्य सेवाओं, डिजिटल साझेदारी, खाद्य प्रसंस्करण और नौसेना के बीच सहयोग बढ़ाने को लेकर समझौता हुआ. जापान ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन में शामिल होने पर अपनी स्वीकृति व्यक्त की.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके जापानी समकक्ष शिंजो आबे के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत में संबंधों को नया आयाम दिया गया. दोनों देशों के बीच 2+2 बातचीत शुरू करने की घोषणा की गई.

दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और सहयोग के नए क्षेत्रों को तलाशने, भारत-प्रशांत क्षेत्र में शांति और समृद्धि पर विचारों को साझा किया. दोनों नेताओं ने संयुक्त वक्तव्य पर हस्ताक्षर किए और भारत-प्रशांत के साथ अफ्रीका में सहयोग को बढ़ाने पर प्रतिबद्धता व्यक्त की. इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण पर आधारित एक्ट ईस्ट नीति पर भारत-जापान के बीच सहयोग को बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की गई. ये संबंध लोकतांत्रिक मूल्यों और स्वतंत्रताओं के प्रति और रूल ऑफ़ लॉ के प्रति साझा प्रतिबद्धता पर आधारित हैं.

जापान के निवेशकों ने भारत में 2.5 बिलियन डॉलर के नए निवेश की घोषणा की है. इससे भारत में लगभग 30 हज़ार लोगों को रोज़गार मिलेगा. इसी यात्रा के दौरान द्विपक्षीय करेंसी स्वैप व्यवस्था पर हुई सहमति से आपसी विश्वास और आर्थिक साझेदारी की निरंतर बढ़ती हुई नज़दीकी साफ़ तौर पर झलकती है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिन की यात्रा के दौरान उनकी पीएम आबे के साथ बेहतरीन केमेस्ट्री देखने को मिली और इसका साफ असर 13वीं शिखर वार्ता के नतीजों में भी देखने को मिला. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने की कवायद भर के  अलावा काफी सार्थक रही है. इससे अफ्रीका और एशिया प्रशांत क्षेत्र में संरचना के विकास पर भविष्य की रणनीति पर भी काफी कुछ सामने आया.

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