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बांग्लादेश: प्रधानमंत्री की हत्या की साजिश में 19 लोगों को सजा ए मौत

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बांग्लादेश की एक अदालत ने 2004 में प्रधानमंत्री शेख हसीना की हत्या की साजिश में भूमिका के लिए विपक्षी बीएनपी प्रमुख खालिदा जिया के भगोड़े बेटे और उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी तारिक रहमान को उम्रकैद और पूर्व गृहमंत्री सहित 19 अन्य को फांसी की सजा सुनाई।

बांग्लादेश की मौजूदा प्रधानमंत्री (तत्कालीन विपक्षी नेता) हसीना को लक्ष्य बनाते हुए यह हमला 21 अगस्त, 2004 को अवामी लीग की एक रैली पर उस समय किया गया था जब हजारों समर्थकों के सामने वह अपना भाषण खत्म करने वाली थी। हसीना इस हमले में बच गईं थीं लेकिन उनकी सुनने की क्षमता को कुछ नुकसान हुआ था। उनकी पार्टी की महिला मोर्चा प्रमुख और पूर्व अध्यक्ष जिल्लुर रहमान की पत्नी इवी रहमान की इस विस्फोट में मौत हो गई थी।

विशेष अदालत के न्यायाधीश शाहिद नुरूद्दीन ने पूर्व कनिष्ठ गृह मंत्री लुत्फोजमां बाबर, पूर्व उपशिक्षा मंत्री अब्दुस सलाम पिंटू तथा सेना के कई पूर्व खुफिया अधिकारियों सहित 19 लोगों को मौत की सजा सुनाई। रहमान तथा 18 अन्य को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। ग्यारह अन्य को विभिन्न अवधि की कारावास की सजा दी गई। कुल 49 में से 31 दोषी अदालत में मौजूद थे जबकि 51 वर्षीय रहमान सहित अन्य न्याय का सामना करने से बचने के लिए विदेश भाग गये हैं। रहमान अब बीएनपी के कार्यवाहक अध्यक्ष हैं क्योंकि उनकी मां भ्रष्टाचार के एक मामले में पांच साल के कारावास की सजा काट रही हैं।

रहमान पर उनकी गैरमौजूदगी में मुकदमा चला और अदालत ने उन्हें एक ‘भगोड़ा’ घोषित कर दिया था। वह फिलहाल लंदन में हैं जहां माना जा रहा है कि उन्होंने शरण मांगी है। हालांकि ब्रिटिश अधिकारियों ने उनकी आव्रजन स्थिति के बारे में बताने से इनकार कर दिया है।

भ्रष्टाचार मामले में फरवरी में जिया के जेल जाने के बाद रहमान निर्वासन में रहकर मुख्य विपक्षी पार्टी बीएनपी का नेतृत्व करते रहे। जिया को इस मामले में आरोपी नहीं बनाया गया। इस मामले में रहमान, दो पूर्व मंत्रियों और तत्कालीन बीएनपी नीत गठबंधन सरकार के पूर्व पुलिस एवं खुफिया अधिकारियों सहित 49 लोगों को आरोपी बनाया गया था।

न्यायाधीश ने मुख्य रूप से हसीना पर निशाना लगाने के लिए किये गये हमले की पृष्ठभूमि, मंशा और परिणाम पर 12 बिन्दु में टिप्पणियां कीं। न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हमले की मंशा शेख हसीना सहित अवामी लीग नेतृत्व को खत्म करने की थी।’’अदालत ने 18 सितंबर को सुनवाई पूरी कर ली थी।

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