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सरकारी बैंक प्रमुखों के रिटायरमेंट की उम्र हो सकती है 70 वर्ष, संसदीय समिति ने की मांग

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नई दिल्ली। इस दशक कई बैंकों के प्रमुख रिटायर होने वाले हैं। इस बीच एक संसदीय समिति ने सरकारी बैंकों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) की सेवानिवृत्ति उम्र को मौजूदा 60 वर्ष से बढ़ाकर 70 वर्ष करने की मांग की है। यह मांग ऐसे समय में सामने आई है जब सरकारी बैंक पैनल के समक्ष निकट भविष्य में नेतृत्व संकट का मुद्दा उठा चुके हैं।वित्त पर बनी संसदीय समिति ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा, “वरिष्ठ बैंकरों की विशेषज्ञता का उपयोग करने के लिए सरकारी बैंकों के सीईओ के रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाकर 70 कर दी जानी चाहिए, जैसा कि निजी क्षेत्र के बैंकों के कुछ मामलों में देखा गया है।”सितंबर 2014 में भारतीय रिजर्व बैंक ने निजी क्षेत्र के बैंकों में सीईओ और पूर्णकालिक निदेशकों के लिए रिटायरमेंट की उम्र को बढ़ाकर 70 वर्ष की सीमा तय कर दी थी, जबकि इससे पहले इस तरह की कोई उम्र सीमा निर्धारित नहीं थी। वहीं सरकारी क्षेत्र के बैंकों में सीईओ पद के लिए रिटायरमेंट की उम्र 60 वर्ष निर्धारित है। हालांकि केंद्रीय कैबिनेट इनके कार्यकाल में विस्तार दे सकती है।
इस दशक किन बैंक प्रमुखों का खत्म हो रहा है कार्यकाल:-
आईसीआईसीआई बैंक: आईसीआईसीआई बैंक की प्रमुख चंदा कोचर वीडियोकॉन लोन मामले के चलते विवादों में हैं। बैंक मैनेजमेंट का एक धड़ा इस मामले में चल रही जांच प्रक्रिया को लेकर उनके पद पर बने रहने को लेकर ही सवाल खड़े कर रहा है। चंदा कोचर का कार्यकाल मार्च 2019 को खत्म होना है।
इंडसइंड बैंक: इंडसइंड भी निजी क्षेत्र का प्रमुख बैंक है। इस बैंक के प्रमुख रमेश सोब्ती हैं। रमेश का कार्यकाल मार्च 2020 में खत्म होना है।
एचडीएफसी बैंक: मार्केट कैप के लिहाज से एचडीएफसी एक बड़ा बैंक माना जाता है। एचडीएफसी बैंक के प्रमुख का नाम आदित्य पुरी है और उनका कार्यकाल अक्टूबर 2020 को खत्म होना है।
कोटक महिंद्रा बैंक: सेविंग बैंक अकाउंट पर सबसे ज्यादा ब्याज देने वाले प्रमुख बैंकों में शुमार कोटक महिंद्रा बैंक के प्रमुख उदय कोटक हैं और उनका कार्यकाल दिसंबर 2020 में खत्म होना है।

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