मंडी
बरसात में उबले पेयजल का करें प्रयोग, घर के आस-पास जमा न होनें दें व्यर्थ पानी
मंडी- बरसात के मौसम में होने वाली कीट व जलजनित बिमारियों की रोकथाम के लिए मंडी जिला में सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के एक प्रवक्ता ने आज यहां यह जानकारी दी। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे पीने के लिए उबला हुआ पानी प्रयोग में लाएं और अन्य सावधानियां बरतें, ताकि मौसमी बिमारियों से बचा जा सके। उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में डायरिया, डेंगू व मलेरिया जैसी बिमारियां फैलने की अधिक संभावनाएं रहती हैं। कुछ सावधानियां बरतने से इन बिमारियों की चपेट में आने से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि डेंगू की रोकथाम की जा सकती है और इसका उपचार भी संभव है। देश में डेंगू के पाए गए मामलों में 99 प्रतिशत से अधिक रोगी चिकित्सक की सलाह से पूरी तरह ठीक हुए हैं। इसलिए, यदि किसी में डेंगू के लक्षण हों तो अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र अथवा अस्पताल से संपर्क करें। उन्होंने कहा कि इसके लक्षणों में तेज बुखार, अकस्मात तेज सिर दर्द, पीठ दर्द, आंखों को हिलाने में दर्द, त्वचा पर लाल चकते अथवा धब्बे, मांसपेशियों तथा जोडों में दर्द, जी मिचलाना एवं उल्टी होना तथा गंभीर मामलों में मसूड़ों अथवा नाक से खून बहना शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि डेंगू फैलाने वाला मच्छर खड़े हुए साफ पानी में पनपता है। ऐसे में घर के आस-पास पानी जमा न होने दें। वाटर कूलर, पानी की टंकी, पक्षियों के पानी पीने के बर्तन, फ्रिज की ट्रे, फूलदान, नारियल का खेल, टूटे हुए बर्तन व टायर इत्यादि में पानी जमा न होने दें और उनकी नियमित तौर पर सफाई करते रहें। पानी से भरे बर्तनों व टंकियों के ढक कर रखें और कूलर को खाली कर सूखा लें। यह मच्छर दिन के समय विशेष तौर पर सूर्योदय व सूर्यास्त के समय काटता है और ऐसे कपड़े पहनें जो बदन को पूरी तरह से ढकें। उन्होंने कहा कि डेंगू के उपचार के लिए कोई खास दवा या वैक्सीन नहीं है। बुखार उतारने के लिए पैरासीटामोल ले सकते हैं। अन्य दवाओं का इस्तेमाल डाक्टर की सलाह पर करें। डेंगू के प्रत्येक रोगी को प्लेटलेट्स की आवश्यकता नहीं पड़ती है। उन्होंने कहा कि बरसात में उपरोक्त बिमारियों की रोकथाम व उपचार के दृष्टिगत स्वास्थ्य विभाग द्वारा आवश्यक दवाओं इत्यादि का प्रचुर भंडारण किया गया है।