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जब अटल बिहारी वाजपेयी ने भारतीय टीम को कहा- पाकिस्तान जाकर खेल ही नहीं, दिल भी जीतो

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नई दिल्लीः देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन हो गया। उन्होंने शाम 5:05 बजे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में आखिरी सांस ली। अटल एक आदर्शवादी राजनीति के बड़े नेता के रूप में ऊबरकर सामने आए आैर साथ ही महान कवि भी थे, लेकिन इसके अलावा वह बड़े खेल प्रेमी रहे। इसका सबूत उन्होंने अपने कार्यकाल दाैरान उस समय दिया जब बाॅर्डर की तनातनी के कारण भारत-पाकिस्तान के क्रिकेट संबंध बिगड़ चुके थे। इन्हीं रिश्तों को सुधारने के लिए अटल जी ने एक पहल करते हुए मार्च महीने 2004 में भारतीय क्रिकेट टीम का पाकिस्तान का ऐतिहासिक दौरा करवाया। इसे दोनों देशों के संबंधों के लिए यह दाैरा अहम धूरी माना गया था।

टीम ने की थी अटल से मुलाकात
भारत-पाकिस्तान के रिश्तों के बीच जो खटास पैदा हुई थी, उसे खत्म करने के लिए अटल ने खेल का सहारा लिया था। उन्होंने भारतीय टीम को पाकिस्तान का दाैरा करने के लिए इजाजत दी। लगभग 14 साल बाद पहली बार भारतीय टीम साल 2004 में सौरव गांगुली की कप्तानी में पांच वनडे और तीन टेस्ट मैचों की सीरीज खेलने पाकिस्तान रवाना हुई। दौरे पर जाने से पहले भारतीय टीम ने अटल बिहारी वाजपेयी से खास मुलाकात की थी।

टीम को दी थी खास सलाह
इस दौरान अटल जी ने खेल भावना दिखाते हुए न सिर्फ भारतीय टीम का हौसला बढ़ाया बल्कि उपहार स्वरूप एक बल्ला भी दिया। तत्कालीन प्रधानमंत्री ने शुभकामनाओं के तौर पर दिए बल्ले में लिखा था, ‘खेल ही नहीं, दिल भी जीतिए, शुभकामनाएं।विरोध हुआ पर अटल की उम्मीदें जीतीं
देश में इस सीरीज का काफी विरोध भी हुआ था। मगर अटल को भरोसा था कि भारत वहां तिरंगा लहराएगा। गांगुली की अगुवाई में भारतीय टीम ने पहली बार पाकिस्तान को उसके घर पर जाकर पटखनी दी थी। भारत ने 3-2 से वनडे आैर 2-1 से टेस्ट सीरीज पर कब्जा किया आैर इसी के साथ अटल की उम्मीदें भी जीत गईं। बता दें कि वीरेंद्र सहवाग ने इसी दाैरान मुल्तान में हुए पहले टेस्ट में तिहरा शतक (309 रन) जमाकर इतिहास रच दिया था।

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