जम्मू और कश्मीर

हड़ताल के बावजूद कोई हिंसा नहीं होना एक सकारात्मक बदलाव : डीजीपी वैद

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श्रीनगर : अलगाववादी नेताओं सैयद अली शाह गिलानी, मीरवायज उमर फारुक और यासीन मलिक के संयुक्त प्रतिरोध नेतृत्व (जे.आर.एल.) द्वारा अनुच्छेद 35 ए के मामले पर आहूत दो दिवसीय हड़ताल के बावजूद कोई हिंसा नहीं हुई जो एक सकारात्मक बदलाव है। यह बात आज यहां पुलिस महानिदेशक (डी.जी.पी.) डॉ एस.पी. वैद ने कही।  आज यहां डी.जी.पी. ने पत्रकारों को बताया कि अनुच्छेद 35 ए एक राजनीतिक मुद्दा हैं। मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। मामले को लेकर कश्मीर में स्थिति खराब होने की पूरी आशंका थी लेकिन उन्हें इस बात का संतोष है कि हड़ताल के बावजूद कहीं भी हिंसा नहीं हुई। हालांकि, कुछ इलाकों में पत्थराव की घटनाओं का अनुभव किया गया लेकिन वह सब मामूली थी।

सही दिशा में करे उर्जा का इस्तेमाल
वैद ने घाटी में आतंकवाद का जिक्र करते हुए कहा कि उपद्रवियों द्वारा राजनीतिक मतलब के लिए युवाओं को गुमराह करके आतंकवाद के रास्ते पर धकेलना और फिर उन युवाओं को सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ों में मारे जाना अत्यंत कष्टकारी है। उन्हें इससे बहुत कष्ट होता है। जीवन अनमोल है, ईश्वर एक ही बार जीवन देता है। हमें इसे अच्छी तरह जीना चाहिए। उन्होंने कहा कि मेरी कश्मीरी युवाओं से अपील है कि वह अपनी ऊर्जा को गलत और नकारात्मक गतिविधियों में खर्च करने के बजाय समाज और देश के कल्याण में लगाएं।

 कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील

जम्मू कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और कानून व्यवस्था को बनाए रखने में राज्य पुलिस की भूमिका की सराहना करते हुए ड़ी.जी.पी. ने कहा कि हमारे जवान और अधिकारी अत्यंत चुनौतीपूर्ण स्थिति में अपने काम को अंजाम दे रहे हैं। राज्य पुलिस की बेहतरी के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहे हैं।

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