पंजाब

कैप्टन अमरिन्दर सिंह के निजी प्रयासों स्वरूप केंद्र सरकार द्वारा पंजाब में दो कॉमन फैसिल्टी सैंटरों की स्थापना को हरी झंडी

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30 करोड़ रुपए की लागत से लुधियाना और फगवाड़ा में स्थापित किये जाएंगे दोनों सैंटर
राज्य में औद्योगिक विकास को मिलेगा प्रौत्साहन
चंडीगढ़,
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के निजी प्रयासों स्वरूप भारत सरकार ने पंजाब में औद्योगिक विकास को प्रौत्साहन देने के लिए 30 करोड़ रुपए की लागत से 2 कॉमन फैसिल्टी सैंटर (सी.एफ.सीज़.) स्थापित करने की मंजूरी दी है।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग मंत्रालय के सचिव अरुण कुमार पांडा के नेतृत्व में नई दिल्ली में हुई मंत्रालय की मीटिंग के दौरान इन फैसिल्टी सैंटरों को मंज़ूरी दी गई। इस मीटिंग में पंजाब सरकार द्वारा उद्योग और व्यापार के डायरैक्टर डी.पी.एस. खरबन्दा ने प्रतिनिधित्तव किया।  एक सरकारी प्रवक्ता के मुताबिक आईल एक्सपैलर (तेल निकालने संबंधी) बनाने का फैसिल्टी सैंटर लुधियाना में जबकि फाउूंडरी एंड जनरल इंजीनियरिंग कलस्सर फगवाड़ा में स्थापित किया जाना है। दोनों सैंटर 15 -15 करोड़ रुपए की लागत से स्थापित किये जाने हैं जो 24 महीनों में चालू हो जाएंगे। प्रवक्ता ने बताया कि आईल एक्सपैलर फैसिल्टी सैंटर की स्थापना से वार्षिक 100 करोड़ रुपए से 250 करोड़ की निर्यात क्षमता को उत्साह मिलेगा और 2000 से 3500 व्यक्तियों के लिए रोजग़ार के मौके पैदा होंगे।
फगवाड़ा में स्थापित किया जाने वाला केंद्र उत्तरी भारत में अपनी किस्म का पहला केंद्र होगा जहाँ रिवायती कच्चे लोहे पर आधारित डीज़ल इंजनों के विकल्प के तौर पर एल्लुमीनियम आधारित डाई इंजन तैयार किये जाएंगे। रिवायती डीज़ल इंजन आमतौर पर सेमग्रसत इलाकों में से पानी निकालने और सिंचाई के लिए कृषि पंप सैट्टों के लिए इस्तेमाल किये जाते हैं। एल्लुमीनियम डाई आधारित नई प्रौद्यौगिकी से पंजाब के किसानों को बहुत फ़ायदा होगा क्योंकि इससे लागत कीमत 6000 रुपए प्रति एकड़ तक घट जायेगी।
एल्लुमीनियम डाई इंजन बनाने के लिए आधुनिक इंटेग्रिश -300 मशीन से लैस फैसिल्टी सैंटर से जहां स्थानीय स्तर पर इंजनों की माँग पूरी होगी, वहां अतिरिक्त उत्पादन देश के बाकी हिस्सों में सप्लाई किया जायेगा जिससे इस क्षेत्र में चीन और जापान को मुकाबला दिया जा सकेगा।  लोहे पर आधारित इंजन का भार दोगुना, तेल का उपभोग अधिक और ज़्यादा ख़र्चीला हैं। औसतन 45 किलो के एल्लुमीनियम आधारित इंजन के मुकाबले लोहे के इंजन का भार 130 किलो है। इसी तरह लोहे के इंजन का 0.8 लीटर प्रति घंटा उपभोग के मुकाबले एल्लुमीनियम आधारित इंजन का 0.4 लीटर तेल का उपभोग है। इसके इलावा एल्लुमीनियम इंजन की कीमत 10 हज़ार जबकि लोहे के इंजन की कीमत 15 हज़ार रुपए है।
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