पंजाब

पर्यावरण मंत्री ने डेरा बस्सी की दो फ़ैक्टरियाँ में मारा छापा

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ट्रीटमैंट प्लांटों की की जांच ; दस दिनों में सभी मापदंड पूरे करने के निर्देश
चंडीगढ़,
औद्योगिक इकाईयों का प्रदूषित पानी प्राकृतिक जल स्रोतों में गिरनेे से रोकने के मकसद से पर्यावरण मंत्री श्री ओम प्रकाश सोनी ने आज डेरा बस्सी की दो बड़ी फ़ैक्टरियों फेडरल एग्रो प्राईवेट इंडस्ट्रीज लि. और नैक्टर लाईफ़ साईंसेेज लि. में छापा मारा। छापे के दौरान दोनों औद्योगिक इकाईयों के पानी सुधारने वाले प्लांटों (ईटीपी) में कुछ कमियां पाई गई, जिस पर श्री सोनी ने दोनों फ़ैक्टरियों के प्रबंधकों को 10 दिनों का समय देकर प्रदूषण रोकने संबंधी ज़रुरी मापदंड पूरे करने के लिए कहा। इसके बाद में अपेक्षित कार्यवाही की जायेगी। पर्यावरण मंत्री ने पर्यावरण विभाग और पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड (पीपीसीबी) के अधिकारियों को कहा कि वह प्राकृतिक जल स्रोतों को दूषित होने से रोकने के लिए औद्योगिक इकाईयों पर कड़ी निगाह रखें। उन्होंने कहा कि वह औद्योगिक इकाईयों का दूषित पानी कुदरती जल स्रोतों में फेंकने को बर्दाश्त नहीं करेंगे। वह दो माह पहले भी घग्गर का दौरा करके गए थे। उस समय भी औद्योगिक इकाईयों द्वारा दूषित पानी बिना ट्रीट किये फेंका जा रहा था। इसको किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। अब फिर वह यहाँ का दौरा करके स्थिति जानने आए हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी उद्योग ने सरकारी हिदायतों की पालना न की और दूषित पानी नदियों में फेंकना जारी रखा तो उसके खि़लाफ़ सख्त कार्यवाही की जायेगी।
कैबिनेट मंत्री ने अधिकारियों को यह यकीनी बनाने के लिए कहा कि औद्योगिक इकाईयां अपने ट्रीटमेंट प्लांट बाकायदा चलने यकीनी बनाएं और जिन इकाईयों में प्लांट बंद पड़े हैं, वह चलाए जाएँ जिससे नदियों में फेंकने से पहले पानी को ट्रीट करना यकीनी बनाया जाये। उन्होंने कहा कि पर्यावरण विभाग और प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के अधिकारियों की सांझी जि़म्मेदारी बनती है कि उनके अधीन आते इलाकों में उद्योग किसी भी तरह का प्रदूषण न फैलाएं। चंडीगढ़ और हरियाणा के उद्योगों द्वारा घग्गर नदी में पानी फेंकने संबंधी सवाल पर श्री सोनी ने कहा कि पंजाब सरकार ने इस संबंधी हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन को अपेक्षित कार्यवाही हेतु लिख दिया है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार राज्य के पर्यावरण को सुधारने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेगी और इस दिशा में युद्ध स्तर पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उद्योगपतियों की भी नैतिक जि़म्मेदारी बनती है कि वह उद्योग का दूषित पानी प्राकृतिक जल स्रोतों में न फेंकें। उन्होंने लोगों को भी अपील की कि वह भी प्रदूषण रोकने में अपना योगदान डालें। उन्होंने कहा कि वह आगे भी छापे जारी रखेंगे जिससे ज़मीनी हकीकत का पता चले और अपेक्षित कार्यवाही की जा सके। इस मौके पर उनके साथ पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड (पीपीसीबी) के चेयरमैन प्रो. सतविन्दर सिंह मरवाहा और पर्यावरण विभाग के पटियाला के मुख्य इंजीनियर गुलशन राय भी उपस्थित थे।
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