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हरियाणा सरकार ने सार्वजनिक या निजी स्वास्थ्य संस्थानों में दाखिल कोविड मरीजों के लिए स्वीकृत साक्ष्य के आधार पर टॉसिलिजुम्ब इंजेक्शन के वितरण के संबंध में दिशा-निर्देश किए जारी

चण्डीगढ़ – हरियाणा सरकार ने सार्वजनिक या निजी स्वास्थ्य संस्थानों में दाखिल कोविड मरीजों के लिए स्वीकृत साक्ष्य के आधार पर टॉसिलिजुम्ब इंजेक्शन के वितरण के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन दिशानिर्देशों के अनुसार जिन कोविड अस्पतालों को कोविड-19 मरीजों के उपचार के लिए टॉसिलिज़ुम्ब की आवश्यकता होगी, उन्हें इस दवा के वितरण का निर्णय लेने के लिए गठित की गई विशेषज्ञ समिति को ई-मेल ह्लशष्द्ब.द्धड्डह्म्4ड्डठ्ठड्डञ्चद्दद्वड्डद्बद्य.ष्शद्व पर इस दवा के लिए आग्रह करना होगा।इन दिशानिर्देशों के अनुसार, कोई भी डॉक्टर या अस्पताल कहीं से भी टॉसिलिजुम्ब की खरीद के लिए प्रिस्क्रीप्शन जारी नहीं करेगा, क्योंकि दवा का वितरण सरकार द्वारा नियंत्रित है। आवेदन प्रोफार्मा के अनुसार करना होगा और अधूरे एवं प्रोफार्मा के बिना भेजे गए आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा। उन्होंनेे बताया कि तकनीकी समिति प्रतिदिन दो बार सुबह 10-11 बजे और शाम को 4-5 बजे वर्चुअल या डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बैठक करेगी। प्रवक्ता ने बताया कि निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं (डीएचएस), एमएसडी बैठक बुलाएंगे और तकनीकी समिति के साथ समन्वय स्थापित करके तेजी से निर्णय लेने की सुविधा प्रदान करेंगे क्योंकि यही समय की मांग है। इसके अतिरिक्त, वे अनुमोदन से लेकर संबंधित अस्पताल में दवा की डिलीवरी तक दवा के समग्र प्रबंधन की निगरानी भी करेंगे।उन्होंने बताया कि सभी प्राप्त आवेदनों की जांच की जाएगी। इसके अलावा, प्रत्येक बैठक के निर्णय से सभी हितधारकों को अवगत कराया जाएगा और निर्णय को स्वास्थ्य विभाग की वेबसाइट पर प्रदर्शित भी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अनुमोदित आवेदक अस्पताल को इंजेक्शन की कीमत संबंधित सिविल सर्जन के पास जमा करवानी होगी। दवा देने से इनकार करने के मामले में इनकार करने के कारणों को लिखा जाएगा और अपेक्षित अस्पतालों / चिकित्सकों को सूचित किया जाएगा। इसके अलावा, डीएचएस (एमएसडी) सभी रिकॉर्ड बनाए रखेंगे।सिविल सर्जन उसी दिन दवा जारी करना सुनिश्चित करेंगे और स्टोर रोजाना दिन-रात खुला रहेगा। दवा वितरण के संबंध में प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि एचएमएससीएल के साथ तालमेल करके डीएचएस (एमएसडी) द्वारा स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के अनुमोदन के बाद भविष्य में भी दवा का वितरण सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंनेे बताया कि इसके अलावा, संबंधित अस्पताल यह रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे कि केवल अनुमोदित मरीज के लिए ही दवा का उपयोग किया गया है।इंजेक्शन के उचित उपयोग के बारे में प्रवक्ता ने कहा कि टॉसिलिजुम्ब इंजेक्शन की मांग करने वाले संस्थानों के अस्पताल प्रशासक की यह व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी कि वे डॉक्टर के पर्चे की दवा का उचित उपयोग, स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ समन्वय और उचित रिकॉर्ड रखना सुनिश्चित करें ताकि बाद में ऑडिट उद्देश्य के लिए रिकॉर्ड उपलब्ध हो। उन्होंने बताया कि यदि इंजेक्शन टॉसिलिजुम्ब जारी कर दिया जाता है और बाद में रोगी की मृत्यु हो जाती है, तो संबंधित अस्पताल मरीज को राशि की प्रतिपूर्ति करेगा और दवा को स्टॉक में रखेगा ताकि अनुमोदन उपरांत भविष्य में उसका उपयोग किया जा सके।

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