पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भारत को बड़ी कामयाबी , इस वर्ष के क्लाईमेट चेंज इंडेक्स में भारत पहले 10 देशों में शामिल.भारत पहली बार इस वर्ष के जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक (सीसीपीआई) में शीर्ष दस देशों में शामिल हुआ है। वहीं अमेरिका सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले देशों में पहली बार शामिल हुआ है। स्पेन की राजधानी मैड्रिड में ‘कॉप 25’ जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में मंगलवार को सीसीपीआई रिपोर्ट जारी की गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में प्रति व्यक्ति उत्सर्जन और ऊर्जा इस्तेमाल का मौजूदा स्तर ‘‘उच्च श्रेणी’’ में नौवें स्थान पर है। हालांकि यह अभी तुलनात्मक रूप से कम है। अपनी जलवायु नीति के प्रदर्शन के लिए उच्च रेटिंग के बावजूद विशेषज्ञों का कहना है कि भारत सरकार को अभी जीवाश्म ईंधन पर दी जा रही सब्सिडी को चरणबद्ध तरीके से कम करने के लिए रूपरेखा बनानी होगी जिसक परिणामस्वरूप कोयले पर देश की निर्भरता कम हो जाएगी. पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन पर भारत ने ”जो कहा है, वह कर रहा है” और उसने अपनी जीडीपी के 21 फीसदी तक उत्सर्जन तीव्रता को कम किया है। मैड्रिड में जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र मसौदा सम्मेलन सीओपी- 25 की उच्च स्तरीय बैठक में प्रकाश जावडेकर ने भारत का रूख पेश किया । उन्होंने कहा कि 2015 के पेरिस शिखर सम्मेलन में किए गए वादे के मुताबिक उत्सर्जन में 35 फीसदी कमी लाने का लक्ष्य हासिल करने के लिए काम जारी है। जावडेकर ने कहा कि जलवायु परिवर्तन वास्तविक है। दुनिया ने इसे मान्यता दी है और इसने पेरिस में व्यापक समझौते को अपनाया। हम पेरिस समझौते को लागू करने पर ध्यान केंद्रित करें और पीछे नहीं हटें।”