पंजाब

श्री गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं को व्यावहारिक जीवन में अपनाना समय की ज़रूरत – डा. सरबजीत कौर सोहल

चंडीगढ़ – पंजाब साहित्य अकादमी, चंडीगढ़ द्वारा आज श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व को समर्पित ‘श्री गुरु नानक देव जी संबंधी रचित पंजाबी साहित्य’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सैमीनार का आयोजन किया गया। सैमीनार के स्वागती भाषण के दौरान पंजाब साहित्य अकादमी के प्रधान डा. सरबजीत कौर सोहल ने आए हुए विद्वानों और डैलीगेटों का स्वागत किया।सैमीनार के विषय को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब साहित्य अकादमी, चंडीगढ़ द्वारा श्री गुरू नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व को समर्पित पंजाब और दिल्ली में विभिन्न स्थानों पर सैमीनार /कवि दरबार और अन्य साहित्यक समागमों का आयोजन किया गया। उन्होंने बताया कि गुरू जी के 550वें प्रकाश पर्व पर हमें वृक्ष लगाने चाहिए और उनकी शिक्षाओं को व्यावहारिक जीवन में अपनाना चाहिए। इस श्रृंखला के अंतर्गत ही यह सैमीनार किया गया है। सैमीनार का उद्घाटन करते हुए स. मालविन्दर सिंह जग्गी (डायरैक्टर, सांस्कृतिक मामले विभाग, पंजाब) ने कहा कि श्री गुरू नानक देव जी के जीवन यात्रा पर आधारित यह सैमीनार अकादमी का एक सहृदय प्रयास है। उन्होंने कहा कि श्री गुरू नानक देव जी की शिक्षाओं को आत्मसात करना समय की ज़रूरत है। सैमीनार के पहले अकादमिक शैसन में संवाद का आग़ाज़ करते हुए डा. सतीश कुमार वर्मा ने सैमीनार के विषय के विभिन्न पहलुओं को उजागर करते हुए विद्वानों के लिए संवाद का घेरा बड़ा किया। उन्होंने कहा कि श्री गुरू नानक देव जी एक दीपक की तरह हैं जिनको हम विभिन्न सैमीनारों /कॉन्फ्ऱेंसों में लेकर जाते हैं और अपनी जि़ंदगी की सूनी राहों को रौशन कर रहे हैं।सैमीनार का मुख्य भाषण देते हुए डा. राजिन्दर पाल सिंह बराड़ ने पंजाबी साहित्य की विभिन्न विधियों में पेश होते श्री गुरू नानक देव जी के प्रतिबिंब के हवाले से सैमीनार के संवाद को नयी दिशा दी। सैमीनार में मुख्य -मेहमान के तौर पर पहुँचे डा. सुरजीत पातर ने गुरू नानक देव जी को संगीत और साहित्य में संवाद सृजन करने वाली महान शख्सियत कहा।सैमीनार के दूसरे अकादमिक सैशन की अध्यक्षता डा. मनजीत सिंह द्वारा की गई। इस सैशन में विशेष मेहमान के तौर पर डा. जसबीर कौर जी भी शामिल हुए। डा. दरिया ने कहा कि लोक -साहित्य में श्री गुरू नानक देव जी का सांसारिक रूप पेश हुआ है और यह प्रतिबिंब लोक -मानसिकता में पारस के तौर पर कार्यशील है। डा. मनजिन्दर सिंह ने मध्यकालीन पंजाबी साहित्य के हवाले से यह धारणा प्रस्तुत की कि मध्यकालीन पंजाबी साहित्य में श्री गुरू नानक देव जी का प्रतिबिंब दैवीय और सांसारिक दोनों रूपों में समानांतर पेश हुआ है। डा. कुलदीप सिंह दीप ने आधुनिक पंजाबी कविता के हवाले से गुरू नानक देव जी के प्रतिबिंब को आलोचनात्मक दृष्टि से परखने का यत्न किया। डा. भीम इंदर सिंह ने आधुनिक पंजाबी गलप के संदर्भ के द्वारा गुरू नानक देव जी के प्रतिबिंब को मार्कसी दृष्टि से समझने का यत्न किया। डा. गुरसेवक सिंह लम्बी ने आधुनिक पंजाबी नाटक के हवाले से गुरू नानक देव जी के प्रतिबिंब को डीकोड करने का यत्न किया। इस समय के दौरान प्रसिद्ध चित्रकार जगतार सौखी द्वारा बनाए गए गुरू नानक देव जी से सम्बन्धित चित्रों की विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई।इस प्रोग्राम के दौरान श्री बलवान सिंह सिद्धू, श्री स्वर्ण सिंह, गुरबचन सिंह बोपाराए, सरदारा सिंह चीमा, श्री. दीपक चनारथल, स. मनमोहन सिंह दाऊ, डा. हरजिन्दर सिंह, डा. बाज़ सिंह, डा. दविन्दर सिंह और अन्य शामिल थे।

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