पंजाब

बादल परिवार ने हमेशा ही अपने संकुचित राजनैतिक हितों के लिए श्री अकाल तख्त साहिब की तौहीन की – तृप्त बाजवा

कैप्टन अमरिन्दर सिंह हमेशा विनम्र सिख केे तौर पर अकाल तख्त साहिब को गए

चंडीगढ़ – केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल द्वारा मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह पर श्री अकाल तख्त साहिब का अपमान करने के लगाऐ गए दोष को पूरी तरह नकारते हुये पंजाब के ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री तृप्त रजिन्दर सिंह बाजवा ने आज यहां कहा है कि बादल परिवार ने अपने संकुचित राजनैतिक हितों की पूर्ति के लिए एक नहीं अनेकों बार सिख पंथ की इस सर्वोच्च संस्था के सम्मान को ठेस पहुंचाई है।श्री बाजवा ने कहा कि 31 दिसंबर, 1998 को श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार भाई रणजीत सिंह ने एक हुक्मनामा जारी करके प्रकाश सिंह बादल और गुरचरन सिंह टौहड़ा को हिदायत की थी कि खालसा पंथ की तीसरी सृजना शताब्दी से पहले कोई भी पक्ष एक दूसरे का किसी किस्म का नुकसान न करे। परन्तु प्रकाश सिंह बादल ने राज सता के बलबूते पर 16 मार्च, 1999 को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान जत्थेदार गुरचरन सिंह टौहड़ा को अध्यक्ष के पद से उतार कर श्री अकाल तख्त साहिब के हुक्मनामे की सरेआम उल्लंघना करके इसकी सर्वोच्चता को चुनौती दी थी।पंचायत मंत्री ने कहा कि इस उल्लंघना के दोष में श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ने जब इस सम्बन्धी अकाली दल और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के नेताओं को तलब किया तो बुलावे वाले दिन से पहले ही जत्थेदार भाई रणजीत सिंह को पद से उतार कर एक बार फिर अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार की पदवी का अपमान करने के साथ-साथ श्री अकाल तख्त साहिब के सम्मान को ठेस पहुंचाई । श्री बाजवा ने कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अंतरिम कमेटी की बुलायी गई मीटिंग में भाई रणजीत सिंह को हटा कर उनकी जगह भाई मोहन सिंह को नया जत्थेदार नियुक्त करके ख़त्म हो गई थी और यह अच्छी ख़बर देने के लिए कमेटी के सभी मैंबर अमृतसर के सर्किट हाऊस चले गए थे। जब यह ख़बर मिली कि भाई मोहन सिंह ने जत्थेदार का पद संभालने से न कर दी है तो इन सदस्यों ने सर्किट हाऊस में ही एक गैर-कानूनी मीटिंग करके ज्ञानी पूरन सिंह को श्री अकाल तख्त साहिब का नया जत्थेदार स्थापित कर दिया। प्रकाश सिंह बादल के हुक्मों पर शिरोमणि कमेटी की अंतरिम कमेटी द्वारा की गई यह कार्यवाही न सिफऱ् ग़ैर-कानूनी ही थी बल्कि श्री अकाल तख्त साहिब के साथ जुड़ी पंथक रिवायतों की भी घोर उल्लंघना थी।पंचायत मंत्री श्री बाजवा ने बादल परिवार के द्वारा श्री अकाल तख्त साहिब की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की अगली उदाहरण देते हुये बताया कि जत्थेदार ज्ञानी पूरन सिंह ने उस समय पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की प्रधान बीबी जागीर कौर को पंथक रिवायतों के उल्लंघन के दोष में तनख़ैया करार देकर 12 मार्च, 2000 को श्री अकाल तख्त साहिब पर तलब किया था, परन्तु उस समय के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की शह पर बीबी जागीर कौर ने श्री अकाल तख्त साहिब पर पेश न होकर इस स्थान की सर्वोच्चता को चुनोती दी। इस उल्लंघन के बदले श्री अकाल तख्त के जत्थेदार ने जब 12 मार्च, 2000 को बीबी जागीर कौर को सिख पंथ में से निकाल दिया तो प्रकाश सिंह बादल के हुक्मों पर ज्ञानी पूरन सिंह को भी अकाल तख्त साहिब के पद से चलता करके जोगिन्दर सिंह वेदांती को जत्थेदार लगा दिया गया। परन्तु जब श्री वेदांती ने नानकशाही कैलंडर में संशोधन करने की परवानगी देने से इन्कार कर दिया तो उसे तुरंत पद से उतार कर ज्ञानी गुरबचन सिंह को जत्थेदार लगा दिया।ग्रामीण विकास मंत्री ने इससे भी पिछे जाते हुए बताया कि 1994 में विभिन्न अकाली पक्षों की एकता के लिए श्री अकाल तख्त साहिब के द्वारा निभाई जा रही भूमिका के दौरान तख्त श्री दमदमा साहिब, तलवंडी साबो में एक समागम के दौरान प्रकाश सिंह बादल ने अपनी पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा लिख कर अकाल तख्त के जत्थेदार भाई मनजीत सिंह को सौंप दिया था। परन्तु जब कुछ दिनों के बाद वह अपने इस फ़ैसले से पीछे हो गए तो उनको 6 मई, 1994 को श्री अकाल तख्त साहिब पर तलब कर लिया गया। प्रकाश सिंह बादल ने एक विनम्र सिख के तौर पर अकाल तख्त के सामने पेश होने की बजाय अपने सैंकड़ों समर्थकों को साथ ले जाकर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार को धमकाया और उनकी पदवी की तौहीन की। इस कार्यवाही को श्री अकाल तख्त साहिब पर धावा करने के बराबर बताते हुये श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार प्रो. मनजीत सिंह ने सिख संगत को इन नेताओं को मुँह न लगाने की अपील की थी।श्री बाजवा ने कहा कि बादल परिवार के विपरीत कैप्टन अमरिन्दर सिंह को जब भी श्री अकाल तख्त साहिब पर बुलाया गया तो वह हमेशा एक विनम्र सिख के तौर पर पेश हुए और तख्त साहिब की तरफ से मिले हर आदेश की हू-ब-हू पालना की।शिरोमणि अकाली दल और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के नेताओं द्वारा गुरू नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व को सभी पक्षों द्वारा मिलकर मनाने के जवाब में श्री बाजवा ने कहा कि पंजाब सरकार शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को हर सहयोग दे रही है, परन्तु यह नेता यह तो बताएं कि 1999 में खालसा पंथ की तीसरी शताब्दी को मिलकर न मनाए जाने के लिए कौन जि़म्मेदार था? किन व्यक्तियों ने किसकी शह पर इस सम्बन्धी जारी हुक्मनामे का उल्लंघन करके श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता को चोट पहुंचाई थी? उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त का अपमान करने वाली यह सभी कार्यवाहियां बादल परिवार के द्वारा की गई थीं, जिस संबंधी हरसिमरत कौर बादल को जवाब देना चाहिए।श्री बाजवा ने कहा कि 1999 में खालसा पंथ की तीसरी जन्म शताब्दी भी पंजाब सरकार के द्वारा मनायी गई थी। इस सम्बन्धी 8 अप्रैल को श्री आनन्दपुर साहिब में करवाए गए मुख्य समागम में उस समय के प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री लाल कृष्ण अडवानी समेत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रमुख शख्सियतें शामिल हुई थी, उस समागम की स्टेज सचिव की जि़म्मेदारी पंजाब सरकार के वित्त मंत्री कैप्टन कंवलजीत सिंह ने निभाई थी। श्री आनन्दपुर साहिब में 7 दिन तक चले सरकारी समागमों में हर रोज़ उस समय के कृषि मंत्री गुरदेव सिंह बादल स्टेज सचिव होते थे।उन्होंने कहा कि 2008 में नांदेड़ साहिब, महाराष्ट्र में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का 300 साला गुरगद्दी दिवस और 2017 में पटना साहिब, बिहार में श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी का 350 प्रकाश पर्व भी वहां की राज्य सरकारों के द्वारा ही मनाए गए थे।

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