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कलानौर में स्थापित किया जायेगा अत्याधुनिक प्रौद्यौगिकी वाला शूगरकेन रिर्सच एंड प्रशिक्षण इंस्टीट्यूट-सुखजिन्दर सिंह रंधावा

फ़सली विभिन्नता को बढ़ावा देने और किसानी को बचाने के लिए गन्ने की खेती निभा सकती है अहम योगदान

चंडीगढ़ – किसानों को संकट से उभारने और फ़सली विभिन्नता को बढ़ावा देने के लिए गन्ने की खेती अहम योगदान डाल सकती है जिसके लिए पंजाब सरकार द्वारा गन्ने की खेती को प्रोत्साहन देने और इसकी काश्त के लिए नयी तकनीकों को अपनाने के लिए कलानौर में अत्याधुनिक शूगरकेन रिसर्च एंड प्रशिक्षण इंस्टीट्यूट बनाने जा रही है। यह प्रगटावा सहकारिता मंत्री स. सुखजिन्दर सिंह रंधावा ने आज यहाँ पंजाब भवन में विभाग के अधिकारियों को साथ लेकर गन्ने की खेती से जुड़े माहिरों और पंजाब कृषि यूनिवर्सिटी लुधियाना और देश के सर्वोच्च शूगरकेन इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों के साथ की मीटिंग के उपरांत किया।स. रंधावा ने बताया कि गन्ने की पैदावार बढाक़र किसानों की आय में बढ़ोतरी और सहकारी चीनी मिलों में चीनी का उत्पादन बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के दिशा निर्देशों के अंतर्गत कलानौर में एक विश्व स्तरीय इंस्टीट्यूट स्थापित किया जा रहा है जिसकी रूपरेखा बनाने के लिए शूगरफैड के अधिकारियों और गन्ने की खेती से जुड़े वैज्ञानिकों की एक टीम द्वारा पिछले समय में वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट पुणे का दौरा किया गया और आज की मीटिंग में उस टीम द्वारा दी पेशकारी पर विचार-विमर्श किया गया। स. रंधावा ने कहा कि मीटिंग में पाँच माहिरों की एक टीम बनाने का फ़ैसला किया गया जो 15 दिनों के अंदर इस इंस्टीट्यूट की स्थापना के लिए अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। इस टीम में शूगरकेन ब्रीडिंग इंस्टीट्यूट कोयम्बटूर के डायरैक्टर डा. बख्शी राम, पंजाब कृषि यूनिवर्सिटी लुधियाना के उप कुलपति डा. बी.एस.ढिल्लों, नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमटिड के सलाहकार श्री आर.बी. डौले, शूगरफैड के प्रशासनिक निर्देशक श्री दविन्दर सिंह और राणा शुगर मिल के प्रशासनिक निर्देशक राणा इन्द्र प्रताप सिंह को शामिल किया गया है।सहकारिता मंत्री ने कहा कि किसानी और भूजल को बचाने के लिए फ़सली विभिन्नता को अपनाना समय की बड़ी ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि गन्ने की खेती पंजाब के किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है जिसके लिए इसके अत्याधुनिक खोज के लिए अच्छे इंस्टीट्यूट की स्थापना ज़रूरी थी। उन्होंने कहा कि इस इंस्टीट्यूट के बनने से गन्ने की खेती का बढिय़ा झाड़ होगा। उन्होंने विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस इंस्टीट्यूट की स्थापना के लिए तेज़ी से कदम उठाए जाएँ।मीटिंग के दौरान स. रंधावा द्वारा शूगरफैड की तरफ से रजिस्टर्ड करवाए पंजाब शूगरकेन क्लब के सर्टिफिकेट को जारी किया गया। इस क्लब में समूह मिलों के कम से कम 50 प्रगतिशील गन्ना काश्तकार, जी.एम., और सी.सी.डी.ओ. मैंबर लिए जाएंगे। इसके अलावा कुछ अधिकारी, पंजाब कृषि यूनिवर्सिटी, केन कमिश्नर के नुमायंदों के अलावा सहकारिता विभाग के संस्थान मिल्कफैड, मार्कफैड और नाबार्ड के मैंबर भी शामिल किए जाने का विचार है। यह क्लब पंजाब के गन्ना काश्तकारों की बेहतरी के लिए काम करेगा और गन्ने की खेती के तजुर्बे भारत के दूसरे राज्यों के साथ सांझे करने के अंतर्गत गन्ना काश्तकारों को प्रशिक्षण दिए जाने का प्रबंध करेगा। यह क्लब गन्ना काश्तकारों को केंद्र और राज्य सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडियाँ प्राप्त कर कर गन्ना काश्तकारों को इसका लाभ दिलाएगा। गन्ना काश्तकारों की मुश्किलों संबंधी सरकार को अवगत करवाएगा।इस मौके पर मुख्यमंत्री के राजसी सचिव कैप्टन सन्दीप सिंह संधू, विधायक स. कुलबीर सिंह ज़ीरा और स. बरिन्दरमीत सिंह पाहड़ा, अतिरिक्त मुख्य सचिव सहकारिता श्री विसवाजीत खन्ना, रजिस्ट्रार सहकारी सभाएं श्री विकास गर्ग, सचिव व्यय श्री वी.एन. जादे, शूगरफैड के प्रशासनिक निर्देशक श्री दविन्दर सिंह, शूगरकेन ब्रीडिंग इंस्टीट्यूट कोयम्बटूर के डायरैक्टर डा. बख्शी राम, पंजाब कृषि यूनिवर्सिटी लुधियाना के उप कुलपति डा.बी.एस.ढिल्लों, नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्टरीज लिमटिड के सलाहकार श्री आर.बी.डौले, केन कमिश्नर श्री यशवंत सिंह, राणा शुगर मिल के प्रशासनिक निर्देशक राणा इन्द्र प्रताप सिंह, डा. के.एस.थिन्द, सहायक केन कमिश्नर श्री विजय कुमार, डा. गुलज़ार सिंह संघेड़ा, शूगरफैड के जनरल मैनेजर श्री हरबख्श सिंह, डिप्टी चीफ़ इंजीनियर श्री कंवलजीत सिंह, डा. एस.पी. सिंह आदि उपस्थित थे।

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