पंजाब

गमाडा ने सिंपुर में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण का दिया ठेका

पंजाब सरकार राज्य के लोगों को बढिय़ा सुविधाएं देने के लिए वचनबद्ध- सरकारिया

चंडीगढ़ – मोहाली जिले के निवासियों की पानी के समस्या को खत्म करने के लिए ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) ने जर्मनी स्थित कंपनी मेसर्स वेओलिया (भारत) प्राइवेट लिमटिड को गांव सिंपुर में एक वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (डब्ल्यूटीपी) लगाने के लिए ठेका दिया है जिसके द्वारा भाखड़ा मेन लाइन से ट्रीटेड नहरी पानी की सप्लाई को बढ़ाया जाएगा।आवास निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री, पंजाब, श्री सुखबिंदर सिंह सरकारिया ने आज यह खुलासा करते हुए कहा कि मल्टी-नेशनल कंपनी दिसंबर 2020 तक वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण का कार्य पूरा कर लेगी और इस प्लांट, जिसका निर्माण 33 एकड़ जमीन पर किया जाएगा, की अनुमानित लागत 115 करोड़ रु आएगी। वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण से मोहाली के निवासियों को पीने के पानी की सप्लाई की जाएगी।श्री सरकारिया ने आगे कहा कि गमाडा बहुत जल्द काजौली वाटर वक्र्स से डिस्ट्रीबूशन मेन पाइपलाइन बिछाने के लिए एक टेंडर जारी करेगा। भूजल का स्तर गिरने से ट्यूबवेल भी बेअसर हो रहे हैं, इसलिए नहर के पानी की सप्लाई ही एक अच्छा विकल्प रह गया है।श्री सरकारिया ने कहा कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार राज्य के लोगों को बढिय़ा सुविधाएं प्रदान करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। वर्तमान में शहर को रोज़ाना लगभग 15 एमजीडी पानी की सप्लाई हो रही है और फिर भी व्यस्त सीजन के दौरान 15 एमजीडी पानी की कमी रहती है। मंत्री ने कहा कि वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण और डिस्ट्रीबूशन पाइपलाइन के डालने से मोहाली निवासियों की पेय जल की मांग और सप्लाई के फर्क को भरने में मदद मिलेगी।गौरतलब है कि काजौली वाटर वक्र्स स्कीम के 5वें, 6वें, 7वें और 8वें चरणों के तहत 80 एमजीडी पानी की सप्लाई देने का प्रस्ताव है, जिसके लिए ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) ने पहले ही 2200 मिमी व्यास के एमएस पाइप काजौली हेड वक्र्स से मोहाली के नजदीक गांव सिंपुर तक बिछा दी हैं। इसमें से 40 एमजीडी नहरी पानी की सप्लाई चंडीगढ़ को दी जाएगी और उतने ही पानी की सप्लाई मोहाली को दी जाएगी। चंडीगढ़ के दिये गये 40 एमजीडी हिस्से के पानी में से मोहाली को 5 एमजीडी नहर के पानी की अतिरिक्त सप्लाई दी जाएगी जैसा कि वर्ष 1983 में प्रोजैक्ट के पहले चरण के लिए पानी के बटवारे संबंधी तत्कालीन गृह मंत्री की अध्यक्षता अधीन हुई एक बैठक में निर्णय लिया गया था। काजौली वाटर वक्र्स स्कीम के पहले चार चरणों के लिए उसी जल बंटवारे के पैटर्न को दोहराया गया है।

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