हिमाचल प्रदेश

नए पर्यटन स्थलों में अधोसंरचना विकास पर 480 करोड़ खर्च किए जाएंगे :मुख्यमंत्री

एशियन विकास बैंक के तहत राज्य में अनछुए तथा नए पर्यटन गंतव्यों में अधोसंरचना के विकास पर 480 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी। एशियन विकास बैंक ने राज्य के लिए 1892.04 करोड़ रुपये की ट्रैंच-2 परियोजना स्वीकृत की है। यह बात मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज यहां पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना के अन्तर्गत प्रथम चरण में राज्य में पर्यटन विकास के लिए विभिन्न गतिविधियों पर 800 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि बुनियादी सुविधाओं, अधोसंरचना को सुदृढ़ करने तथा राज्य के अनछुए पर्यटन गंतव्यों में क्षमता निर्माण पर 480 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इन स्थलों में सम्मेलन केन्द्र, पर्यटन सांस्कृतिक केन्द्र, फूड पार्क तथा पार्किंग स्थलों का विकास किया जाएगा।

जय राम ठाकुर ने कहा कि नाहन, सोलन, पालमपुर, डलहौजी, ऊना, केलंग, ताबो तथा काजा शहरों के सौन्दर्यीकरण पर 180 करोड़ रुपये खर्च करने प्रस्तावित हैं। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के अन्तर्गत धरोहर भवनों के संरक्षण और मुरम्मत पर 45 करोड़ रुपये तथा क्षमता निर्माण पर 50 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि ‘नई राहें-नई मंजिलें’ नई योजना पर राज्य सरकार ने मण्डी जिला के जंजैहली, शिमला जिला के चांशल, कांगड़ा जिला के बीड़-बिलिंग तथा कुल्लू जिला के लारजी को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सैलानियों तथा स्थानीय लोगों की सुविधा के लिए रोहतांग सुरंग के दोनों ओर फूड पार्क तथा पार्किंग सुविधाओं को विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सैलानियों की सुविधा के लिए राज्य में अधिक से अधिक रज्जू मार्गों की स्थापना के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि हाल ही में श्री आनन्दपुर साहिब-श्री नयना देवी जी रज्जू मार्ग के निर्माण के लिए राज्य सरकार तथा पंजाब सरकार के बीच समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया गया है, जो दो धार्मिक स्थलों को एक-दूसरे से जोड़ेगा। उन्होंने कहा कि 150 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले धर्मशाला-मैकलोड़गंज रज्जू मार्ग के निर्माण कार्य में तेजी लाई जाएगी। उन्होंने कहा कि यह परियोजना अगले वर्ष मई महीने तक पूरी कर ली जाएगी। उन्होंने कहा कि पलचान से रोहतांग रोप-वे का निर्माण वर्ष 2022 तक पूरा कर लिया जाएगा, जबकि आदी-हिमानी से चामुण्डा और भूंतर से बिजली महादेव रोप-वे का निर्माण शीघ्र ही आरम्भ किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार ने राज्य के लिए उड़ान-दो के तहत छः गंतव्य चिन्हित किए हैं। इन गंतव्यों में बद्दी, शिमला, रामपुर, नाथपा-झाखड़ी, कंगनीधार (मण्डी) और मनाली शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन स्थानों पर अधोसंरचना के उन्नयन होने पर पर्यटकों के लिए बेहतर हवाई सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि शिमला के समीप संजौली में अगले वर्ष मई तक हेलीपोर्ट का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कई मानव निर्मित जलाशय जैसे चमेरा, पौंगबांध, गोबिन्दसागर, तत्तापानी, लारजी और पंडोह हैं। इन सभी जलाशयों में साहसी और जल क्रीडा़ओं के लिए प्रमुख पर्यटक आकर्षण केन्द्र बनने की क्षमता मौजूद है। उन्होंने कहा कि इन झीलों को जल क्रीड़ाओं, शिकारा, नौकायन, हाउस वोट, सी प्लेन आदि अन्य मनोरंजक गतिविधियों के लिए विकसित किया जाएगा।

जय राम ठाकुर ने कहा कि राज्य सरकार पंडोह बांध पर जल क्रीड़ाओं तथा अन्य मनोरंजक गतिविधियों को शुरू करने के मुद्दे को भाखड़ा ब्यास प्रबन्धन बोर्ड के साथ उठाएगी, जिससे इसे पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जा सकें। उन्होंने कहा कि पर्यटकों की सुविधा एवं आकर्षण के लिए आवश्यक अधोसंरचना का सृजन करके लारजी बांध को पर्यटक आकर्षण के रूप में विकसित किया जाएगा।

अतिरिक्त मुख्य सचिव पर्यटन रामसुभग सिंह ने मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए कहा कि पर्यटन विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि इन सभी स्थानों को विकसित करके इन्हें पर्यटन मानचित्र पर लाया जाए। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र के उद्यमियों को इन पर्यटन परियोजनाओं में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करने के प्रयास किए जाएंगे।

मुख्य सचिव बी.के. अग्रवाल, मुख्यमंत्री के प्रधान निजी सचिव विनय सिंह, अतिरिक्त निदेशक पर्यटन मनोज शर्मा तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

 

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