पंजाब

पंजाब विधानसभा के स्पीकर द्वारा दादूवाल संबंधी सुखबीर के दोषों की जांच करने के लिए सुखजिन्दर सिंह रंधावा के नेतृत्व में सदन की कमेटी का गठन

चंडीगढ़,
मुख्यमंत्री की विनती को स्वीकृत करते हुए पंजाब विधानसभा के स्पीकर ने कैप्टन अमरिन्दर सिंह के निवास स्थान पर उनके और सिख प्रचारक बलजीत सिंह दादूवाल के बीच मीटिंग होने संबंधी शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल द्वारा लगाए गए दोषों की जांच के लिए कैबिनेट मंत्री सुखजिन्दर सिंह रंधावा के नेतृत्व अधीन सदन की कमेटी का गठन कर दिया है। शिरोमणि अकाली दल के विधायक द्वारा उठाए गए मुद्दों में दख़ल देते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने सुखबीर को ‘गलतबयानी का माहिर’ बताया क्योंकि उन्होंने गलत सूचना देकर सदन को गुमराह किया है । उन्होंने कहा कि जिस टावर की स्थिति संबंधी सुखबीर ने जानकारी दी है वह है ही नहीं । उन्होंने कहा कि अकाली नेता का साफ़ उद्देश्य गलत सूचना को फैलाना है ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुखबीर ने शेखी मारने के लिए दादूवाल के साथ उनकी जो भी तस्वीरें दिखाई हैं वह पंजाब भवन में उनकी एक वफद के साथ हुई मीटिंग के दौरान खिंची गई हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि यह कोई ख़ुफिय़ा मीटिंग नहीं थी बल्कि इसकी मीडिया में बड़े स्तर पर कवरेज हुई थी । उन्होंने कहा कि इस वफद में विभिन्न राजनैतिक पार्टियों के नेता शामिल थे जिनमें यू.ए.डी., एस.ए.डी. (मान), एस.ए.डी. (1920) शामिल थे । यह वफद अपनी माँगों की सूची लेकर आया था जिसमें बेअदबी के मामले का पता लगाना, बेअदबी के मामले में शामिल लोगों को गिरफ्तार करना, राज्य और राज्य से बाहर की जेल में अपनी सजा मुकम्मल करने के बावजूद टाडा के तहत नजऱबन्दियों की रिहाई और तबादला के अलावा अन्य माँगें भी शामिल थी। उन्होंने बताया कि दादूवाल इन्हीं नेताओं के साथ उसी वफद में आए थे ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वास्तविकता यह है कि अगर एक ही तरह की सेहत और सूरत दिखने वाले पाँच व्यक्ति दादूवाल के साथ खड़े हों तो वह उनको पहचान नहीं सकते । उन्होंने कहा कि सदन की कमेटी द्वारा की जाने वाली जांच सुखबीर के झूठों का पर्दाफाश करेगी और इस मामले की सच्चाई को सामने लाएगी । अपने सरकारी निवास स्थान का सी.सी.टी.वी. की सख्त निगरानी अधीन होने का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने सुखबीर को इनकी रिकार्डिंग चैक करवाने की चुनौती दी । इसी दौरान आम आदमी पार्टी के विधायक हरविन्दर सिंह फुलका ने सुखबीर की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि अगर किसी मामले में दादूवाल मुख्यमंत्री के साथ मिलते हैं तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है । उन्होंने कहा कि दादूवाल धमकियोंं का सामना कर रहे हैं और उनको इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री तक पहुँच करने का हर अधिकार है ।
इससे पहले कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने सुखबीर के दोषों की जांच के लिए सदन की कमेटी गठित करने का प्रस्ताव किया जिसको स्पीकर राणा कंवरपाल सिंह ने स्वीकृत कर लिया । इस संबंधीे आम आदमी पार्टी के सदस्यों ने भी अपनी सहमति दी ।
सोमवार को मुख्यमंत्री ने शिरोमणि अकाली दल के प्रधान की तरफ से आधारहीन दोषों के साथ सदन को गुमराह करने की की गई कोशिश की तीखी आलोचना की थी । बेअदबी के मामलों संबंधी जस्टिस (रिटा.) रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट सरकार की तरफ से सदन में रखे जाने के तत्काल ही यह दोष लगाऐ थे । इससे पहले मुख्यमंत्री की अध्यक्षता अधीन ही राज्य मंत्रीमंडल की मीटिंग में कार्यवाही रिपोर्ट (ए.टी.आर.) के साथ आयोग की रिपोर्ट को स्वीकृत कर लिया गया था । मंत्रीमंडल ने यह रिपोर्ट सदन में रखे जाने की औपचारिक सहमति दे दी थी ।
दादूवाल को कभी भी न मिले होने और उनकी न ही पहचान होने की बात पर ज़ोर देते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने सुखबीर के दोषों के सम्बन्ध में कहा कि जब वह पुलिस गोलीबारी के बाद बरगाड़ी गए थे, तो उनको बताया गया था कि सिख प्रचारक भी वहां बैठे थे परन्तु उन्होंने दादूवाल को कभी भी नहीं देखा और न ही कभी मिले । कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि अकाली पिछले 10 सालों के अपने कुकर्मों से लोगों का ध्यान एकतरफ़ करने के लिए यह ढकोसला कर रहे हैं । उन्होंने कहा कि अकाली अपने शासन के दौरान बेअदबी की घटनाओं को रोकने में विशेष तौर पर असफल रहें हैं। उन्होंने अकाली नेताओं को रिपोर्ट संबंधी बहस में शामिल होने की चुनौती दी । उन्होंने कहा कि अकालियों को इस बहस से भागना नहीं चाहिए और वह पिछले समय से महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर ऐसा करते आ रहे हैं ।

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