भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी का दिल्ली के आर्युविज्ञान संस्थान में निधन हो गया. वह 93 साल के थे। युग-पुरुष, जननायक, विकास पुरुष, राजनीति के पुरोधा, युगदृष्टा , महाव कवि, विचारक अटल बिहारी वाजपेयी अब हमारे बीच नहीं रहे । शाम पांच बजकर पांच मिनट पर दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अंतिम सांस ली । 11 जून से एम्स में भर्ती वाजपेयी जी की हालत पिछले 36 घंटे से बिगड़ गयी थी और आखिरकार शाम साढे पांच बजे के करीब एम्स ने उनके निधन का दुखद समाचार सार्वजनिक कर दिया । इस खबर के आते ही देश में शोक की लहर दौड़ गयी है । हर कोई अटल जी के निधन से गमगीन हो गया । राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उनके निधन पर जारी शोक संदेश में कहा – पूर्व प्रधानमंत्री व भारतीय राजनीति की महान विभूति श्री अटल बिहारी वाजपेयी के देहावसान से मुझे बहुत दुख हुआ है। विलक्षण नेतृत्व, दूरदर्शिता तथा अद्भुत भाषण उन्हें एक विशाल व्यक्तित्व प्रदान करते थे। उनका विराट व स्नेहिल व्यक्तित्व हमारी स्मृतियों में बसा रहेगा । उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने भी उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। पिछले दो दिनों में दो बार वाजपेयी जी को देखने के लिए एम्स जा चुके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तो वाजपेयी जी के निधन का समाचार पाकर जैसे निशब्द हो गए । उन्होंने ट्वीट किया ।
मैं नि:शब्द हूं, शून्य में हूं, लेकिन भावनाओं का ज्वार उमड़ रहा है। हम सभी के श्रद्धेय अटल जी हमारे बीच नहीं रहे। अपने जीवन का प्रत्येक पल उन्होंने राष्ट्र को समर्पित कर दिया था। उनका जाना, एक युग का अंत है। लेकिन वो हमें कहकर गए हैं-
“मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं,
ज़िन्दगी सिलसिला, आज कल की नहीं
मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं,
लौटकर आऊँगा, कूच से क्यों डरूं?”
तमाम केंद्रीय मंत्रियों और बीजेपी नेताओं ने उन्हें श्रद्दांजलि दी है । अपनी भाषणकला, मनमोहक मुस्कान, वाणी के ओज, लेखन व विचारधारा के प्रति निष्ठा तथा ठोस फैसले लेने के लिए विख्यात वाजपेयी को देश के विकास के रास्ते पर तेजी से ले जाने का श्रेय दिया जाता है । अटल बिहारी वाजपेयी यूं तो भारतीय राजनीतिक पटल पर एक ऐसा नाम है, जिन्होंने अपने व्यक्तित्व व कृतित्व से न केवल व्यापक स्वीकार्यता और सम्मान हासिल किया, बल्कि तमाम बाधाओं को पार करते हुए 90 के दशक में बीजेपी को स्थापित करने में भी अहम भूमिका निभाई. यह वाजपेयी के व्यक्तित्व का ही कमाल था कि बीजेपी के साथ उस समय नए सहयोगी दल जुड़ते गए, वो भी तब जब बीजेपी राजनीतिक तौर पर अकेली मानी जाती थी । कांग्रेस से इतर किसी दूसरी पार्टी के देश के सर्वाधिक लंबे समय तक प्रधानमंत्री पद पर आसीन रहने वाले वाजपेयी के निधन पर तमाम राज्यों के मुख्य़मंत्रियों ने भी श्रद्धांजलि दी । एम्स से उनके शव को 6 कृष्णमेनन मार्ग ले जाया गया जहां तमाम लोग अंतिम श्रद्धांजलि के लिए पहुंच रहे हैं।