पंजाब

धान की पराली के प्रबंधन के लिए किसानों को कृषि मशीनरी पर मिलेगी 395 करोड़ रुपए की सब्सिडी

कृषि विभाग द्वारा व्यापक प्रोग्राम की शुरुआत
मुख्यमंत्री द्वारा किसानों को 28641 मशीनें समय पर मुहैया करवाने की हिदायत
50 प्रतिशत से लेकर 80 प्रतिशत तक मिलेगी सब्सिडी
चंडीगढ़,
राज्य में धान की पराली जलाये जाने से रोकने के लिए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के दिशा -निर्देशों पर शुरू की गई विशेष मुहिम की लड़ी में पंजाब कृषि विभाग ने मौजूदा वित्तीय साल में किसानों को कृषि मशीनरी पर 395 करोड़ रुपए की सब्सिडी मुहैया करवाने के लिए व्यापक प्रोग्राम आरम्भ किया है। इसके अंतर्गत धान की पराली के प्रबंधन के लिए किसानों को 28,641 कृषि यंत्र और मशीनेंं सब्सिडी पर दी जानी हैं।  एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि इस स्कीम के अंतर्गत किसानों को 50 प्रतिशत से ले कर 80 प्रतिशत तक सब्सिडी मुहैया करवाई जा रही है।  प्रवक्ता ने आगे बताया कि कैप्टन अमरिन्दर सिंह सरकार द्वारा साल 2018 -19 और 2019 -20 के लिए कृषि मशीनरी पर 665 करोड़ रुपए की सब्सिडी मुहैया करवाने के किये गए एलान के अंतर्गत किसानों को यह सब्सिडी दी जा रही है। 
प्रवक्ता ने बताया कि 12 हज़ार कृषि मशीनें किसानों को व्यक्तिगत तौर पर 50 प्रतिशत की सब्सिडी पर मुहैया करवाई जा रही हैं। इसी तरह 514 किसान समूहों को 5280 और 3547 प्राथमिक कृषि सहकारी सभाओंं को 16655 कृषि मशीनें 80 प्रतिशत सब्सिडी पर दी जा रही हैं जिससे कृषि मशीनरी बैंक स्थापित करके इन मशीनों को आगे किसानों को मुहैया करवाया जा सके।  प्रवक्ता ने बताया कि सब्सिडी पर दी जाने वाली कृषि मशीनरी में हैपी सिडर, पैडी स्टरा चौपर /कटर, मलचर, आर.एम.बी. पलाओ, शरब्ब कटर, ज़ीरो टिल्ल ड्रिल, कम्बाईनों पर सुपर स्टरा मैनेजमेंट सिस्टम, रोटरी सलैशर और रोटावेटर शामिल हैं।  मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग को कहा कि किसानों को यह मशीनें समय पर मुहैया करवाने को यकीनी बनाया जाये। उन्होंने विभाग को धान की पराली जलाने से होते बुरे प्रभावों संबंधी किसानों में जागरूकता पैदा करने के लिए व्यापक स्तर पर सूचना शिक्षा संचार योजना बनाने की भी हिदायत की। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस जागरूकता मुहिम के अंतर्गत फ़सलों के अवशेषों के प्रबंधन के लिए सम्बन्धित मशीनरी का प्रदर्शन करने के साथ-साथ किसानों को प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। राज्य में पराली जलाये जाने को पूरी तरह रोकने को यकीनी बनाने के लिए इस स्कीम को प्रभावी ढंग से अमल में लाने के लिए मुख्यमंत्री ने सभी डिप्टी कमीशनरों को धान की पराली जलाने के विरुद्ध मुहिम का नेतृत्व करने के निर्देश दिए हैं क्योंकि देश के उत्तरी हिस्से में यह समस्या प्रदूषण का बड़ा कारण बनी हुई है।
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