पंजाब

घरेलू श्रमिकों की रजिस्ट्रेशन के लिए ऑनलाईन पोर्टल जारी

बलबीर सिंह सिद्धू ने पोर्टल जारी करने बाद में घरेलू श्रमिकों को सरकार द्वारा फोटो पहचान कार्ड बांटे
श्रम मंत्री द्वारा श्रमिक जत्थेबंदियों और ट्रेड यूनियनों के अधिकारियों के साथ उच्च -स्तरीय मीटिंग
5 एकड़ से कम ज़मीन वाले किसानों और कृषि मज़दूरों को ग़ैर संगठित मज़दूरों की श्रेणी में शामिल करने के लिए प्रस्ताव पास
सर्वसम्मति से पास प्रस्ताव को केंद्र सरकार के पास भेज कर कम कृषि वाले और खेत मज़दूरों के समूह कजऱ्े माफ करने की की जायेगी मांग
चंडीगढ़,
पंजाब सरकार द्वारा आज घरेलू श्रमिकों की रजिस्ट्रेशन करने के लिए ऑनलाईन वेब पोर्टल लांच किया गया। इस पोर्टल के लांच के बाद अब पंजाब में घरेलू श्रमिकों की रजिस्ट्रेशन करके उनको श्रम विभाग द्वारा चलाईं जा रही विभिन्न कल्याण स्कीमों के अधीन सुविधा मुहैया करवाई जायेगी। यह जानकारी देते हुए पंजाब सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि ‘डोमैस्टिक वर्करज़ ऑनलाईन पोर्टल’ को श्रम मंत्री पंजाब स. बलबीर सिंह सिद्धू ने आज लाइवस्टॉक भवन मोहाली में एक समागम के दौरान जारी किया। इस मौके पर स. सिद्धू ने कुछ श्रमिकों की ऑनलाईन रजिस्ट्रेशन किये जाने के बाद उनको विभाग द्वारा फोटो पहचान कार्ड भी सौंपे। स. सिद्धू ने बताया कि घरेलू श्रमिकों एक ऐसा वर्ग था जिसको उसकी मेहनत का पूरा मूल्य नहीं मिलता था और कई मौकों पर उसको अपने मालिक के शोषण का शिकार भी होना पड़ता था। उन्होंने कहा कि अब इन घरेलू श्रमिकों की रजिस्ट्रेशन लाजि़मी होने के बाद जहाँ उनको कम से -कम मेहनताना मिलेगा, उस के साथ ही सरकार द्वारा  श्रमिकों के कल्याण के लिए बनाईं गई स्कीमों का लाभ भी मिल सकेगा। उन्होंने बताया कि कोई भी घरेलू श्रमिक अपने क्षेत्र के लेबर इंस्पेक्टर कार्यालय या फिर सेवा केंद्र में जाकर अपने आप को रजिस्टर्ड करवा सकता है। रजिस्ट्रेशन के बाद उसे फोटो पहचान कार्ड सरकार द्वारा दिया जायेगा। इससे पहले स. बलबीर सिंह सिद्धू ने मोहाली में ही पंजाब भर की समूह ट्रेड यूनियनों और श्रमिकों की दूसरे विभिन्न जत्थेबंदियों के अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय मीटिंग भी की। इस मीटिग का मुख्य मंतव्य श्रमिकों को ज़मीनी स्तर पर आती कठिनाईयोँ को विचारना था और इसके साथ ही श्रमिकों जत्थेबंदियाँ और ट्रेड यूनियनों द्वारा श्रमिकों के कल्याण के लिए उठाई जा रही माँगों को भी विचारना था। स. बलबीर सिंह का समूह श्रमिकों जत्थेबंदियाँ और ट्रेड यूनियनों के अधिकारियों ने इस मीटिंग को बुलाने के कारण धन्यवाद किया। उन्होंने बताया कि पिछले 10 वर्षों से कभी भी श्रमिक  जत्थेबंदियाँ और ट्रेड यूनियनों के अधिकारियों को सरकारों द्वारा मीटिंग के लिए नहीं बुलाया गया। मीटिंग के दौरान श्रमिक जत्थेबंदियों द्वारा मुख्य तौर पर बिल्डिंग एंड अदर कंस्टरक्कशन वर्करज़ की ऑनलाईन रजिस्ट्रेशन के समय आती कठिनाईयों का जि़क्र किया और माँग रखी कि निर्माण श्रमिकों की ऑनलाईन रजिस्ट्रेशन के साथ-साथ ऑफलाईन रजिस्ट्रेशन भी की जाये। इसके साथ ही उन्होंने विभाग को यह माँग भी की कि श्रमिकों की विभिन्न क्षेत्रों में होती लूटमार को रोक कर उनको एक्ट के मुताबिक बनती कम से -कम तनख़्वाह मिलनी यकीनी बनाई जाये। स. सिद्धू द्वारा समूह जत्थेबंदियों के नेताओं को यह विश्वास दिलाया कि पंजाब सरकार श्रमिकों के कल्याण के लिए वचनबद्ध है। उन्होंने हैरानी ज़ाहिर की कि अकाली-भाजपा सरकार ने अपने 10 वर्ष के कार्यकाल के दौरान एक बार भी श्रमिकों की जत्थेबंदियों और ट्रेड यूनियनों के अधिकारियों को मीटिंग के लिए नहीं बुलाया जिस कारण पंजाब में श्रमिकों की दशा बदतर होती गई। उन्होंने कहा कि यह मीटिंग अब हर तीन महीने के बाद बाकायदा तौर पर की जायेगी। इस मीटिंग का मुख्य निष्कर्ष यह निकला कि स. सिद्धू के नेतृत्व में समूह श्रमिक जत्थेबंदियों और ट्रेड यूनियनों के अधिकारियों ने यह प्रस्ताव पास किया कि 5 एकड़ से कम ज़मीन वाले किसानों और खेत मज़दूरों को ग़ैर संगठित मज़दूरों की श्रेणी में रखकर उनके समूह कजऱ्े माफ होने चाहिएं। स. सिद्धू ने बताया कि मीटिंग में पास यह प्रस्ताव अब केंद्र सरकार को भेज कर माँग की जायेगी कि 5 एकड़ से कम ज़मीन वाले किसानों और कृषि मज़दूरों की बुरी आर्थिक दशा को देखते हुए इनको ग़ैर संगठित श्रमिकों के श्रेणी में शामिल करके इनके समूह कजऱ्े माफ किये जाएँ। मीटिंग में ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांगे्रस (्रढ्ढञ्जष्ट), इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (ढ्ढहृञ्जष्ट), सैंट्रल इंडिया ट्रेड यूनियन (ष्टढ्ढञ्ज), भारतीय मज़दूर संघ(क्चरूस्), डेमोक्रेटिक ट्रेड यूनियन सैंटर और चेयरमैन कंस्ट्रक्शन वर्करज़ पंजाब,सैंट्रल ट्रेड यूनियन (ष्टञ्ज), पंजाब निर्माण मज़दूर यूनियन के नुमायंदों ने भाग लिया। मीटिंग में श्री संजय कुमार, प्रमुख सचिव, श्रम विभाग, श्री विमल कुमार सेतिया, श्रम कमिशनर, श्रम विभाग और श्रीमती मोना पूरी, अतिरिक्त श्रम कमिशनर, श्रम विभाग भी उपस्थित थे।
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