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हुंडई को नहीं मिली हाईकोर्ट से राहत

नई दिल्ली। हुंडई मोटर इंडिया लिमिटेड को स्पेयर पार्ट्स की बिक्री और बिक्री उपरांत सेवाओं में प्रतिस्पर्धा रोधी गतिविधियों के मामले में मद्रास हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट ने हुंडई की उस अपील को खारिज कर दिया जो उसने कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (सीसीआइ) के आदेश को चुनौती देते हुए दायर की थी। इस आदेश में प्रतिस्पर्धा रोधी गतिविधियों में कथित संलिप्तता की जांच करने को कहा गया है।जस्टिस हुलुवाडी जी रमेश और आरएमटी टीका रमन की डिवीजन बेंच ने कंपनी की अपील की खारिज कर दिया। कंपनी ने हाईकोर्ट की एकल जज वाली बेंच के चार फरवरी 2015 के फैसले को चुनौती दी थी। एकल पीठ ने अपने फैसले में कहा था कि आरोपों की जांच का दायरा बढ़ाने के सीसीआइ के आदेश को बदला नहीं जा सकता है क्योंकि सीसीआइ के डायरेक्टर जनरल ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जांच का आदेश दिया है।
क्या है मामला?:-यह मामला 2011 का है जबकि नई दिल्ली के शमशेर कटारिया ने सीसीआइ में शिकायत दर्ज कराई थी और देश की तीन कार निर्माता कंपनियों पर प्रतिस्पर्धा रोधी गतिविधियां अपनाने का आरोप लगाया था। इसके बाद सीसीआइ के एडीशनल डायरेक्टर जनरल ने 2011 में जांच में पाया कि कुछ अन्य कार निर्माता भी इसी तरह के तरीके अपनाते हैं। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाने का सीसीआइ ने आदेश दिया।प्रतिस्पर्धा रोधी गतिविधियों में शामिल कंपनियों की सूची में हुंडई का नाम आने पर उसने हाईकोर्ट में जांच का दायरा बढ़ाने के सीसीआइ के आदेश को चुनौती दी। कंपनी का कहना था कि सीसीआइ के एडीशनल डायरेक्टर जनरल के पास उन कंपनियों के खिलाफ जांच करने का अधिकार नहीं है जो शिकायत में शामिल नहीं थी। लेकिन एकल जज की पीठ ने कंपनी का यह तर्क खारिज कर दिया।एकल जज की पीठ के फैसले को बरकरार रखते हुए डिवीजन बेंच ने कहा कि अगर सीसीआइ ने 26 अप्रैल 2011 को निर्देश नहीं दिया होता तो डायरेक्टर जनरल सभी निर्माता कंपनियों के खिलाफ जांच नहीं कर सकता था। कमीशन द्वारा 26 अप्रैल 2011 को दिया गया निर्देश आदेश के समान ही है। इसलिए कार्यक्षेत्र में अतिक्रमण का कोई सवाल नहीं उठता है।

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